“कलेक्टर के आदेश को ठेंगा?”: बिलासपुर एसडीएम की ‘मनमर्जी’ से बदला ट्रांसफर का गणित, बेलतरा के नाम पर सिर्फ एक हल्का!

Gajendra Singh
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कलेक्टर ने बेलतरा भेजा नायब तहसीलदार, एसडीएम ने बिलासपुर में ही बांट दिए 5 हल्के; आदेश पर उठे सवाल, राजस्व विभाग में चर्चा तेज।

बिलासपुर।
जिले के राजस्व विभाग में इन दिनों एक आदेश को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। आरोप है कि कलेक्टर के स्पष्ट आदेश के बावजूद बिलासपुर एसडीएम द्वारा अपने स्तर पर ऐसा आदेश जारी किया गया, जिससे कलेक्टर के ट्रांसफर आदेश की मंशा ही बदलती हुई नजर आ रही है।
दरअसल, लगभग तीन दिन पहले बिलासपुर कलेक्टर ने राजस्व विभाग के 14 तहसीलदार और नायब तहसीलदारों की स्थानांतरण सूची जारी की थी, ताकि राजस्व कार्यों का संचालन सुचारू रूप से हो सके। इसी सूची में नायब तहसीलदार समर्थ थवाईत को बेलतरा तहसील में पदस्थ किया गया था।

कलेक्टर आदेश

लेकिन इसके बाद जारी हुए आदेश ने कई सवाल खड़े कर दिए। आरोप है कि बिलासपुर एसडीएम मनीष साहू ने बड़ी चतुराई से आदेश में बदलाव करते हुए समर्थ थवाईत को बेलतरा का सिर्फ एक हल्का दिया, जबकि बाकी पाँच हल्के बिलासपुर क्षेत्र के सौंप दिए। इनमें मोपका के तीन हल्के और सरकंडा तथा जूनाबिलासपुर के एक-एक हल्का शामिल बताया जा रहा है।

यही नहीं, एक अन्य आदेश में जब किसी तहसीलदार या नायब तहसीलदार के अवकाश के दौरान वैकल्पिक ड्यूटी की सूची जारी की गई, उसमें भी समर्थ थवाईत के नाम के सामने “नायब तहसीलदार एवं कार्यपालन दंडाधिकारी, बिलासपुर” लिखा गया। इससे यह सवाल उठ रहा है कि जब कलेक्टर ने उन्हें बेलतरा भेज दिया है, तो फिर बिलासपुर में पदभार दर्शाने का आधार क्या है।

इस पूरे मामले को लेकर अब राजस्व विभाग के भीतर भी चर्चा तेज है। सवाल यह उठ रहा है कि यदि कलेक्टर ने किसी अधिकारी को बेलतरा तहसील में पदस्थ किया है, तो फिर बिलासपुर एसडीएम द्वारा केवल औपचारिक रूप से एक हल्का बेलतरा का देकर बाकी हल्के बिलासपुर में क्यों दिए गए?

बिलासपुर sdm के आदेश को आधार मानकर फिर तखतपुर बेलगहना और बाकी  नायब तहसीलदारों का क्या गुनाह है स्थानातरित नायबो में से जिन्हें  बेलगहना मिला है उसे कोटा का नायब भी बनाया जा सकता है या जिन्हें सकर्रा  उप तहसील मिला है उसे तखतपुर के भी हल्के दिये जा सकते हैं फिर तो कलेक्टर भी बेकार मेहनत कर रहे सूची निकालने में उन्हें भी सीधे आदेश में लिख देना चाइये की फलाना नायब या तहसीलदार का स्थान्तरण अनुभाग में किया जा रहा है तहसील आबंटित करने का कोई औचित्य नही है क्योंकि “एसडीएम का पद तो कलेक्टर से बड़ा है”।

हालांकि इस संदर्भ में जानकारी के लिए जब एसडीएम बिलासपुर को कॉल लगाया गया तो पूर्व की भांति फिर से एसडीएम साहब काल रिसीव नही किये जिससे उनकी इस प्रतिक्रिया जान पाना मुश्किल हो गया।

वही पे जब इस विषय मे नायब तहसीलदार समर्थ थवाईत से पूछा गया तो उनका कहना तब की जैसा उच्च अधिकारियों का आदेश हम तो आदेश का पालन कर रहे है।

क्या यह कलेक्टर के आदेश की मूल भावना से छेड़छाड़ नहीं है? और अगर बेलतरा में काम प्रभावित नहीं होगा, तो क्या वहां पदस्थ अन्य अधिकारियों के लिए एक हल्का संभालना भी मुश्किल था, जिसके कारण ऐसा आदेश जारी करना पड़ा?

अब देखना यह होगा कि इस पूरे मामले पर जिला प्रशासन क्या रुख अपनाता है और क्या कलेक्टर के मूल आदेश की भावना के अनुरूप स्थिति स्पष्ट की जाएगी या नहीं।

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