लोकनायक के खबर का असर: पिछले साल बिकी हुई कोटवारी भूमि का नामांतरण हुआ निरस्त

Gajendra Singh
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क्या अब रजिस्ट्री शून्य कर पुनः सरकारी खाते में होगा दर्ज या….?

पिछले साल 26 दिसम्बर 2025 को “लोकनायक” द्वारा कोटवारी जमीन बिकने की खबर लगाई गई थी और नामांतरण पर रोक लगाने के लिए राजस्व विभाग के उच्च अधिकारियों को कोटवारी भूमि संबंधित साक्ष्य दिखाते हुए अपील किया गया था। तब जाकर इस विषय को जांच में लिया गया और 03/06/25 को उसका नामांतरण निरस्त कर दिया गया है।
अब देखना ये है कि इस आदेश के बुते इस पर कार्यवाही कर रजिस्ट्री शून्य कर पुनः सरकारी भूमि पे दर्ज किया जाएगा या बिल्डर द्वारा समय का इंतजार कर पुनः इसमें कोई खेल खेला जाएगा।

राजस विभाग के कितने कर्मचारियों और अधिकारियों से हो के गुजरता है कोई दस्तावेज

चूंकि राजस्व विभाग में एक हल्के में एक पटवारी को बैठाया जाता है ताकि वो उस क्षेत्र की संपूर्ण जानकारी रख पाए।
और बहुत से हल्के में तो पटवारी के साथ साथ कोटवार भी रहते है, इसके पश्चात 5 से 7 हल्के के ऊपर एक तहसीलदार/अतिरिक्त तहसीलदार या नायब तहसीलदार भी होते है जो अपने सभी पटवारी पर नजर रखते है ताकि कोई गड़बड़ी न हो पाए। परंतु इसके बाद भी कैसे धड़ल्ले से सरकारी जमीन पे कब्जा/ विक्रय या कोटवारी भूमि का विक्रय हो जाता है और कैसे इनको पता नही चल पाता जबकि सारे जमीनों का दस्तावेज इनके पास होता है। जब एक आम आदमी को पता चल सकता है कि कहाँ का सरकारी भूमि या कोटवारी भूमि बिक गया है तो फिर इनको कैसे पता नही चल सकता है। क्या कारण है कि इस पर बिना शिकायत किये ये रोकथाम की कार्यवाही नही करते। क्या ये इनके कार्यशैली पर शंका पैदा नही करता ?

खैर आपको पिछले साल के एक और कारनामे और हमारे द्वारा लगाए गए खबर के असर के बारे में बताता हूँ।

बिलासपुर तहसील के नगर निगम में नदी उस पार एक हल्के में कोटवारी जमीन पिछले साल बिक गई थी। लगभग 94 डिसमिल जमीन जो की पूर्व में कोटवारी भूमि के रूप में दर्ज थी जिसे राजस्व विभाग के आँखों मे धूल झोंक कर शहर के दो प्रमुख व्यवसायी और एक तथाकथित नेता द्वारा अपने नाम करा ली गई और पिछले साल उस जमीन को रायपुर के एक बिल्डर द्वारा खरीद भी लिया गया था  जबकि छत्तीसगढ़ शासन का आदेश है जितनी भी कोटवारी भूमि है उसका पुनः सरकारी भूमि के रूप में इंद्राज किया जाना है। चूंकि उस समय वर्तमान राजस्व अभिलेखों में उक्त भूमि कहीं भी कोटवारी भूमि दर्ज नही था तथा पटवारी के पास भी ऐसा कोई अभिलेख नहीं था जिसमे की वह कोटवारी भूमि के रूप में दर्ज हो। इसका फायदा उठाकर वर्तमान राजस्व अधिकारियों की आंखों में धूल झोंककर इसे महंगे दाम में विक्रय किया गया। हालांकि पूर्व में भी हमारे न्यूज़ द्वारा खबर लगा कर राजस्व विभाग को सूचित किया गया था, फिर भी राजस्व विभाग से ये चूक कैसे हो गया और जमीन बिक गई।

                बहरहाल इसकी शिकायत हमारे द्वारा उस समय पदस्त वर्तमान राजस्व विभाग के अधिकारी एस डी एम एवं नायब तहसीलदार से किया गया और साक्ष्य दिखाया गया तत्पश्चात नामांतरण रोका गया और 6 महीने बाद 03/06/2025 को नामांतरण निरस्त कर दिया गया।

अब देखना ये है कि कही 2023 में बताने के बाद भी जब 2024 में रजिस्ट्री हो गया था तो क्या इस बार नामांतरण निरस्त करने के बाद कुछ समय रुक कर पुनः आवेदन कर नामांतरण हो जाएगा या इस पर कार्यवाही कर रजिस्ट्री को शून्य कर पुनः सरकार के खाते में कोटवारी भूमि दर्ज किया जाएगा ये के बड़ा सवाल है।

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