पैतृक भूमि का कूटरचित दस्तावेज तैयार कर बिक्री करने वाले सरकण्डा क्षेत्र के 5 भू माफिया के खिलाफ कार्यवाही

Gajendra Singh
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 राजस्व विभाग के जागरूकता से बचा प्रार्थी का जमीन

 प्रार्थी के पैतृक भूमि का कूटरचित दस्तावेज तैयार कर किये बिक्री।

 रजिस्ट्री के दौरान बायोमेट्रिक एवं रेटिना चेक करने के बाद भी इतना बड़ा फर्जीवाड़ा कैसे, क्या ये पंजीयन कार्यालय के कार्यशैली पर सवाल नही उठाता ?

 प्रकरण में आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय किया गया पेश, 2 का न्यायिक रिमाण्ड एवं 3 का लिया गया पुलिस रिमाण्ड।

आरोपी

बिलासपुर में लगभग हर माह जमीन से संबंधित फर्जीवाड़ा का नया विवादित मामला न हो क्या ऐसा संभव है?
फर्जी तरीके से रजिस्ट्री का खेल और उससे पैसा कमाने की चाह भू माफिया में एक चलन से होते जा रहा है इन्हें कानून व्यवस्था का कोई डर नही है। इन्हें बस पैसा कमाना है, कभी खुद से कूटरचित कर या कभी राजस्व कर्मचारियों  से साँठगाँठ कर के, ऐसे राजस्व के अनेकों किस्से है।
आज भी हम आपको एक नए किस्से के बारे में बताने जा रहे है कि कैसे फर्जी तरीके से जमीन की रजिस्ट्री कर उसे बेचने के फिराक में लगे थे भू माफिया।

स्टाम्प

चलिए आपको विस्तार से बताते है:-

मामले का संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है कि प्रार्थी प्रकाश दुबे पिता स्व. भैयालाल दुबे निवासी जूना बिलासपुर ने थाना सरकण्डा में रिपोर्ट दर्ज कराया कि इसकी पैतृक भूमि ग्राम खमतराई पटवारी हल्का नं. 25 में  खसरा क्रमांक 672, रकबा 56 डिस्मिल स्थित है, जो पिता के स्वर्गवास होने पर फौती नामांतरण के आधार पर प्रार्थी एवं इसके मां के नाम पर राजस्व रिकार्ड में दर्ज होकर काबिज था, कि दिनांक 30.03.2025 को इसे जानकारी मिला कि उक्त भूमि का बिक्री हो गया है जिससे वह भूइंया ऐप के माध्यम से जानकारी निकालने पर उक्त भूमि को क्रेता अनुज मिश्रा के पास भैयालाल सूर्यवंषी द्वारा गवाह राहुल पटवा एवं अभिषेक दुबे मिलकर कूटरचित दस्तावेज तैयार कर बिक्री कर दिये हैं, एवं इसके स्व. पिता भैयालाल दुबे के स्थान पर भैयालाल सूर्यवंषी नामक व्यक्ति को खड़ा करके फर्जी आधार कार्ड तैयार कर पंजीयन कराया गया है। प्रार्थी के उक्त रिपोर्ट पर अपराध दर्ज कर विवेचना में लिया गया, प्रकरण की गंभीरता को देखते हुये तत्काल वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बिलासपुर रजनेश सिंह (भापुसे) को अवगत कराया गया जिनके द्वारा प्रकरण के आरोपियों के विरूद्ध वैधानिक कार्यवाही करने निर्देशित किये जिनके निर्देशानुसार अति0 पुलिस अधीक्षक (शहर) राजेन्द्र जायसवाल, सी.एस.पी. सरकंडा  सिद्धार्थ बघेल के दिशा निर्देशन में थाना प्रभारी सरकण्डा निरी. निलेश पाण्डेय के नेतृत्व में टीम तैयार कर  आरोपियों की पता तलाश हेतु रवाना किया गया, जिनके द्वारा आरोपी अनुज कुमार मिश्रा, राहुल पटवा एवं अभिषेक दुबे को निवास स्थान से हिरासत में लेकर पूछताछ करने पर जुर्म स्वीकार करते हुये एक राय होकर भू स्वामि भैयालाल के स्थान पर भैयालाल सूर्यवंशी को राजस्व रिकार्ड में दुरूस्त करा कर करने के उपरांत भू स्वामी के रूप में किसी फर्जी व्यक्ति को खड़ा करने की जिम्मेदारी राहुल पटवा को दी गई जिसके द्वारा अपने रिश्ते का साला आरोपी गोविंदराम निवासी माहुली को 70-75 वर्ष के बुजुर्ग व्यक्ति जुगाड़ कर बिलासपुर लेकर आए ताकि रजिस्ट्री कार्यालय में भू स्वामी भैया लाल बनकर रजिस्ट्री करा सके बातचीत के उपरांत गोविंदराम पटवा के द्वारा अपने गांव के बुजुर्ग व्यक्ति आरोपी मंगलदास को लेकर 4.2.2025 को रजिस्ट्री कार्यालय बिलासपुर पहुंचकर रजिस्ट्री कार्यालय में भैयालाल बनकर मंगलदास पण्डो निवासी माहुली बलरामपुर को खड़ा कराकर अनुज मिश्रा के नाम पर रजिस्ट्री कराना स्वीकार किये जिससे आरोपी मंगलदास पण्डो एवं राम गोविंद पटवा को विधिवत् गिरफ्तार कर न्यायिक रिमाण्ड पर भेजा गया है, आरोपी अनुज कुमार मिश्रा, प्रियांषु मिश्रा एवं राहुल पटवा को गिरफ्तार कर पुलिस रिमाण्ड लिया गया।

फर्जी आधार

आरोपियों के नाम

1. मंगलदास पिता डहकुदास जाति पण्डो उम्र 75 वर्ष निवासी माहुली थाना त्रिकुण्डा जिला बलरामपुर छ.ग.।
2. राम गोविन्द पटवा पिता वासुदेव पटवा उम्र 39 वर्ष निवासी माहुली थाना त्रिकुण्डा जिला बलमरामपुर छ.ग.।
3. अनुज कुमार मिश्रा पिता स्व. अषोक मिश्रा उम्र 35 वर्ष निवासी एमआईजी 278/16, डॉ. दीक्षित गली, शक्ति चौक राजकिषोर नगर सरकण्डा।
4. प्रियांशु मिश्रा पिता विरेन्द्र कुमार मिश्रा उम्र 30 वर्ष निवासी वार्ड क्र. 06, आवासपारा चोरभट्ठी खुर्द थाना सकरी हा.मु. अभिषेक विहार फेस 2, 147/बी, थाना सिविल लाईन बिलासपुर।
5. राहुल पटवा पिता रामलाल पटवा उम्र 31 वर्ष निवासी उस्लापुर अटल आवास क्वा.नं. बी/15, बिलासपुर।

सभी आरोपियों के खिलाफ धारा – 318, 338, 336(3), 340, 3(5), 61(2) बीएनएस तहत कार्यवाही किया गया है।

भूमि का नक्शा

आपको बता दे कि गुप्त सूत्रों से मिले जारकारी के अनुसार तहसीलदार ने तत्परता से इस जमीन की नामांतरण खारिज किया गया अन्यथा ये लोग  जमीन बिक्री के लिए 5 लाख रुपये की ब्याना राशि लेकर सौदा कर बैठे थे।
नाम न बताने के शर्त पर बताया गया कि इनका सौदा बिलासपुर मे उसी क्षेत्र के बड़े बिल्डर साहू जी से 55 लाख में हो चुका था। अगर नामांतरण ख़ारिज करने मे थोड़ा भी लेट होता तो इस जमीन का बिक्री हो जाता, और एक और फर्जी रजिस्ट्री हो जाता।
जैसा कि अभी का नामांतरण प्रक्रिया को किया गया है उस प्रक्रिया के नामांतरण भी बड़ी ही आसानी से हो गए रहता। नामांतरण की इस प्रक्रिया का कभी भी इस प्रकार से दुरुपयोग किया जा सकता है।
खैर जमीन का जिससे सौदा किया गया था उसे इस फर्जीवाड़े का जानकारी था या नही ये कहना मुश्किल है।

अब देखा जाए तो क्या शासन द्वारा लाया गया नामांतरण की नई पद्धिति सही है ?

रजिस्ट्री के दौरान अंगूठे के बायोमेट्रिक द्वारा एवं रेटिना द्वारा चेक करने के बाद भी अगर इतना बड़ा फर्जीवाड़ा हो गया तो क्या ये पंजीयन कार्यालय के कार्यशैली पर सवाल  नही उठाता ?

क्या इस केस में रजिस्ट्री के वक़्त आधार को चेक कर इसका पता नही लगाया जाया जा सकता था कि ये ओरिजनल है या नही ?

क्या भविष्य में इस नई नामांतरण पद्धिति का दुबारा दुरुपयोग नही होगा?

क्या इस पद्धिति का दुरुपयोग कर सरकारी भूमि का रजिस्ट्री के साथ साथ नामांतरण नही कराया जा सकता ?
जैसा कि पिछले खबरों में हमारे द्वारा बताया गया था कि कैसे ग्राम मनपहरी कोटा में बिलासपुर शहर का ही सतीश सिंह नाम का व्यक्ति राजस्व विभाग के ही पटवारी रामफल वस्त्रकार के साथ मिल कर 2021-22 में 20 एकड़ बड़े झाड़ के जंगल को अपने नाम करवा लिया था।
इस पर हमारे द्वारा खबर लगाया गया था जिसको देख वर्तमान कलेक्टर साहब को जानकारी लगते ही उन्होंने तुरंत एसडीएम को आदेशित करते हुए वापस छत्तीसगढ़ बड़े झाड़ के जंगल के नाम पे किया गया।

ऐसे ही अनेको सवाल उठते है अभी की नामांतरण प्रक्रिया पर।

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