
“लोकनायक खबर का असर”
बिलासपुर तहसील कार्यालय में प्राइवेट कर्मचारियों की दबंगई को लेकर प्रकाशित खबर का तुरंत और बड़ा असर देखने को मिला है। 25 दिसंबर 2025 को खूंटाघाट में हुई मारपीट और पत्थरबाज़ी की गंभीर घटना को संज्ञान में लेते हुए तहसीलदार प्रकाश साहू ने कड़ा रुख अपनाया है।
घटना को अनुशासनहीनता और शासकीय गरिमा के विरुद्ध मानते हुए तहसीलदार प्रकाश साहू ने प्राइवेट कर्मचारी संदीप लोनिया को तत्काल प्रभाव से तहसील कार्यालय से बाहर का रास्ता दिखा दिया है। यह निर्णय उस वक्त लिया गया जब मामले की सुगबुगाहट पूरे तहसील कार्यालय में फैल चुकी थी और कर्मचारियों में भारी नाराज़गी देखी जा रही थी।

सूत्रों के अनुसार, तहसीलदार प्रकाश साहू ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि
“तहसील कार्यालय में किसी भी तरह की गुंडागर्दी, दबंगई और अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी, चाहे वह कोई भी हो।”
यह कार्रवाई इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि इससे पहले संदीप लोनिया पर फर्जी EWS प्रकरण सहित कई आरोप लगते रहे, लेकिन हर बार मामला दबता रहा। इस बार जनहित में उठी आवाज़ और मीडिया की भूमिका ने प्रशासन को कदम उठाने पर मजबूर कर दिया।
कार्यवाही से मिला सख्त संदेश
इस कार्रवाई के बाद तहसील कार्यालय में यह संदेश साफ चला गया है कि
अब प्राइवेट कर्मचारियों की मनमानी नहीं चलेगी
शासकीय कार्यालय की मर्यादा से खिलवाड़ करने वालों पर सीधी कार्रवाई होगी
अब सवाल यह है कि
क्या यह कार्रवाई केवल एक नाम तक सीमित रहेगी,
या फिर तहसील कार्यालय में वर्षों से जड़ जमा चुके प्राइवेट सिस्टम पर भी कैंची चलेगी?
फिलहाल इतना तय है कि
बिलासपुर तहसील में उठी आवाज़ ने असर दिखाया है — और यह शुरुआत मानी जा रही है।


