
छत्तीसगढ़ शासन द्वारा आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति कल्याण विभाग में पदस्थापना के लिए दिशानिर्देश जारी किया गया है।
क्या ये प्रक्रिया उचित रूप से लागू होगा ?
क्या यहाँ सिर्फ और सिर्फ आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति कल्याण विभाग से जुड़े अधीक्षकों की ही नियुक्ति की जाएगी या अभी भी अन्य विभाग के कर्मचारी इसमें अटैच ही रहेंगे?
आपको बता दूँ की कुछ विभागों में एक विभाग इस है जो सबसे ज्यादा अटैचमेंट के साथ अन्य विभाग में कार्य कर रहे है और वो विभाग है शिक्षा विभाग।

बोला जाता है कि अगर आप शिक्षा विभाग में शिक्षक है तो क्या फर्क पड़ता है आपको कौन सा सिर्फ पढ़ाने का ही काम मिलेगा। आप चाहे तो अलग अलग विभाग में अटैचमेंट ले अपने सहूलियत के हिसाब से काम कर सकते है।
वैसे देखा जाए तो शिक्षको की कमी आज भी है और उसकी पद खाली है जबकि अगर शासन चाहे तो अगर अलग अलग विभाग में अटैच शिक्षकों को ही निकाला जाए तो आधी खाली पड़ की पूर्ति हो जाये।
पर हर जिले के उच्च अधिकारियों के चहेते शिक्षकों का क्या होगा वो कहाँ जाएँगे।
शिक्षकों के हर विभाग के अटैचमेंट से होने वाली बाकी दूसरे विभागों के तकलीफों का जीवंत उदाहरण आज के इस लोकनायक द्वारा प्रसारित इस खबर से आपको पता चल जाएगा।
गौरतलब है आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति कल्याण विभाग में शासन ने छात्रावास अधीक्षकों की प्रमोशन पश्चात पदस्थापना करने का निर्णय लिया है। शासन द्वारा प्राप्त निर्देश अनुसार उक्त प्रक्रिया संदेह के घेरे में आ सकती है।
प्रश्रचिन्ह खड़ा करने वाले सवाल:
1. पूर्व में 3 साल पहले प्रोमोशन पदस्थापना की याद अभी ही क्यों आई ?
2015 में नियुक्त अधीक्षकों का प्रोमोशन 2022 में ही हो गया था, लेकिन पदस्थापना 3 साल बाद करना समझ से परे है।
2. 2016 बैच के नियुक्त अधीक्षक जिनका प्रोमोशन आदेश अचानक से 11/6/25 की रात को प्रसारित किया गया, जबकि उनकी पदस्थापना आदेश 10/6/25 को यानि एक दिन पहले से देना पूरी प्रक्रिया को संदिग्ध बनाता है।
3. विभाग द्वारा परीक्षा के माध्यम से चयनित अधीक्षकों को जोकि कई जिलों में पर्याप्त संख्या में उपलब्ध हैं,प्राथमिकता न दे कर शिक्षा विभाग के अटैच शिक्षकों को प्राथमिकता देना समझ से परे है क्योंकि राज्य में शिक्षकों की कमी को ले कर वैसे भी युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया चल रही है, ऐसे में उन्हें मूल विभाग के लिए रिलीव किया जाना चाहिए।
4. 2022 में हुए प्रोमोशन और वर्तमान में हुए प्रोमोशन की एक साथ पदस्थापना समझ से परे है क्योंकि शासन के नियम के अनुसार पदस्थापना तुरंत हो जानी चाहिए न कि 3 साल बाद।
5. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वर्तमान में जिन ‘स’ श्रेणी के अधीक्षकों को विभाग द्वारा हटा कर अन्य जिलों में पदस्थापना करने का निर्णय लिया गया है, उनके स्थान पर फिर से चहेते शिक्षकों की नियुक्ति करने का प्लान है। क्योंकि उनके स्थान पर फिर काम कौन करेगा क्योंकि नवीन चयनित अधीक्षकों की नियुक्ति पहले ही विभाग कर चुका है।
6. चूंकि छात्रावास अधीक्षक का पद राज्य कैडर का रखा गया है तथा इसके नियोक्ता “आयुक्त आदिवासी विभाग इंद्रावती भवन नया रायपुर” हैं । इनका राज्य स्तर पर कॉउंसलिंग न करा कर जिला स्तर पर काउंसिलिंग कराना शंका को जन्म देता है।
7. प्रतिनियुक्ति का प्रयोग शासन द्वारा कर्मचारियों की कमी होने पर किया जाता है तथा नियम यही है कि अपने विभाग में कर्मचारियों की भर्ती हो जाने पर दूसरे विभाग के कर्मचारियों को मूल विभाग के लिए मुक्त कर दिया जाये परन्तु उनको संरक्षण दे कर अपने ही कर्मचारियों को बाहर करने की मंशा विभाग पर उंगली उठा रही है।




