
आरआई (राजस्व निरीक्षक) पदोन्नति परीक्षा को लेकर लंबे समय से उठ रहे सवालों पर अब हाईकोर्ट की मुहर लग गई है। कोर्ट ने अपने अहम फैसले में साफ शब्दों में कहा है कि चयन प्रक्रिया में फेवरिटिज़्म, नेपोटिज़्म और मालप्रैक्टिस के स्पष्ट संकेत पाए गए हैं। न्यायालय के अनुसार यह परीक्षा न तो निष्पक्ष थी और न ही पारदर्शी, जिससे पूरी चयन प्रक्रिया प्रणालीगत रूप से दूषित साबित हुई।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस मामले में किसी भी चयनित पटवारी को प्रशिक्षण (Training) पर भेजने का आदेश नहीं दिया जाएगा। साथ ही इस विषय से जुड़ी सभी रिट याचिकाएं खारिज कर दी गई हैं। न्यायालय ने यह भी कहा कि यह निर्णय आपराधिक मामलों को प्रभावित नहीं करेगा, क्योंकि EOW/ACB और न्यायालय अपने-अपने स्तर पर स्वतंत्र रूप से जांच और निर्णय करेंगे।
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को यह छूट दी है कि यदि चाहे तो पूरी परीक्षा प्रक्रिया को रद्द कर नई, निष्पक्ष और पारदर्शी परीक्षा आयोजित कर सकती है। उल्लेखनीय है कि ACB की जांच के बाद अब न्यायालय ने भी मान लिया है कि आरआई भर्ती/पदोन्नति परीक्षा में गंभीर गड़बड़ियां हुई हैं।
एक लाइन में फैसला:
हाईकोर्ट ने माना कि RI पदोन्नति परीक्षा भ्रष्ट और दूषित थी, इसलिए चयनित अभ्यर्थियों को भी प्रशिक्षण का लाभ नहीं दिया जा सकता।
हाईकोर्ट के आदेश के प्रमुख अंश
पैरा 23:
कोर्ट ने कहा कि मामले के तथ्य साफ तौर पर दर्शाते हैं कि सिलेक्शन प्रोसेस खुद ही गलत व्यवहार से भरा हुआ था। इसमें पक्षपात और भाई-भतीजावाद के संकेत हैं, जिससे पूरी परीक्षा ही दूषित हो गई। इसलिए यह नहीं माना जा सकता कि परीक्षा पारदर्शी और निष्पक्ष थी।
पैरा 29:
अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसी चयन प्रक्रिया के आधार पर याचिकाकर्ताओं को रेवेन्यू इंस्पेक्टर के प्रमोशनल पद के लिए ट्रेनिंग पर भेजने का कोई आदेश नहीं दिया जा सकता। इस मुद्दे पर कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं के खिलाफ फैसला सुनाया।
पैरा 24:
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इस निर्णय का यह अर्थ नहीं होगा कि परीक्षा में गड़बड़ी से जुड़े आपराधिक मामलों पर कोई अंतिम राय बना ली गई है। आपराधिक न्यायालय कानून के अनुसार अपने समक्ष उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर स्वतंत्र रूप से निर्णय करेगा।
साथ ही राज्य सरकार को पटवारी से RI पद पर पदोन्नति के लिए नई, निष्पक्ष और पारदर्शी परीक्षा आयोजित करने की स्वतंत्रता दी गई है, ताकि परीक्षा की पवित्रता और ईमानदारी बनी रहे।
पैरा 25:
उपरोक्त टिप्पणियों और निर्देशों के साथ रिट याचिकाओं के पूरे समूह को खारिज कर दिया गया।


