
बिलासपुर। शासन के सबसे महत्वपूर्ण कार्य धान खरीदी लगभग अंतिम स्थिति में पहुंच चुकी है परंतु टोकन काटने विलंब और एक दिन में धान खरीदी की लिमिट तय करने के बाद शासन की महत्वपूर्ण योजना धान खरीदी में एक और ग्रहण लगता नजर आ रहा है लोरमी एसडीएम ने बचे हुए सभी किसानों का बचत बिक्री हेतु धान का भौतिक सत्यापन करवाना पटवारीयो से शुरू करा दिया है और इस आधार पर पटवारी को काफी हद तक दबाव भी दिया जा रहा है कि वह कैसे भी करके शेष किसानों का रकबा समर्पण करवाकर शासन की धान खरीदी में राशि को काम किया जा सके, शासन एक तो धान खरीदी के बड़े-बड़े वादे करती है ऊपर से उन्हीं के नाक के नीचे मुंगेली जैसे छोटे जिलों के कलेक्टर और एसडीएम रकबा समर्पण करवाने दबाव शासन के बिना पूछे तो नहीं लिया होगा अमूमन लगभग अधिकतर जिलों में यह कार्रवाई तेजी गति से चल रही है ,पटवारी को रकबा समर्पण करवाने उनके लिए नोटिस जारी किए जा रहे हैं, और अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए दबाव डाला जा रहा है :-
अब विस्तार से समझिए :-
1:- शासन प्रति एकड़ ₹3100 की दर से 21 क्विंटल धान खरीदी करने का निर्णय चुनाव पूर्व लिया था इसी 3100 ₹ के कारण भाजपा शासन की वापसी का एक मुख्य कारण था ।
2:-राशि बहुत ज्यादा धान खरीदी में शासन की खपत होती है तो इसे विभिन्न तरीकों पर कम करने कलेक्टर के माध्यम से रकबा समर्पण की कार्रवाई करवा रही है ऐसा प्रतीत होता है।
3:- सबसे पहले जो गिरदावरी शासन के पटवारी फ्री में करते थे क्योंकि वह शासन के कर्मचारी थे शासन ने उसके लिए गांव के दसवीं पास व्यक्तियों से ₹10 प्रति खसरे की दर से गिरदावरी करनी प्रारंभ की उसके बाद पटवारी द्वारा भी गिरदवारी अलग से की गई इसके बाद जिन खबरों में डीसीएस गिरदवारी में त्रुटि हुई उसको खाद्य विभाग के भौतिक सत्यापन ऐप से विगत दो महीना से सुधरवाया जा रहा है।
4:- इसके इसके अलावा शासन द्वारा पटवारी से लेकर कलेक्टर तक गिरदवारी जांच कराई जा कराई गई , एग्री स्टेक पोर्टल शुरू हुआ उसमें भी कई खामियां हैं कई किसानों का पंजीयन छूट गया उनके लिए आज दिनांक तक पंजीयन चालू रखा गया है ,अब समझ में नहीं आता जो कार्य पिछले वर्ष तक एक ही गिरदवारी से चल जाता था और डीसीएस गिरदावरी में भी इतनी त्रुटियां हो गई तो ₹10 प्रति खर्च कर शासन के करोड़ों स्वाहा हो गए ।
भौतिक सत्यापन ऐप पर धान काटने के बाद भी अब सुधार करना क्या उचित है? क्या जिन्होंने धान नहीं उगाई थी ,वह अभी धान इंद्राज नहीं करवा सकते सब संभव है ? कुल मिलाकर शासन की स्थिति पिछले वर्ष की भांति हो गई कि शासन ने डीसीएस करवाना चाह ताकि पड़त जमीनों को छोड़कर बोए गये रकबे अनुसार धान की खरीदी की जाए परंतु यह सिस्टम भी पूरा फैलियर साबित हुआ और शासन के करोड रुपए का नुकसान अलग और अब शासन के अंतर्गत जिलों में एसडीम/ कलेक्टर द्वारा रकबा समर्पण करवाने पटवारी पर दबाव डाला जा रहा है ,ताकि कम से कम खरीद कर कम से कम बजट बचाया जा सके ऐसा प्रतीत हो रहा है?
पटवारी संघ ने कलेक्टर को ज्ञापन दिए हैं कि अधिकारियों द्वारा जबरन रकबा समर्पण हेतु दबाव बनाया जा रहा एवं प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने भी इसे फेसबुक पर अपलोड कर शासन से जवाब मांगा है।।











