अधीक्षकों के न्यायालय शरण मे जाने के आसार

गौरतलब है कि विगत दिनों हमने अपने न्यूज़ के माध्यम से आपको बताया था और ये शंका जताई थी कि आदिवासी विकास विभाग में हो रही छात्रावास अधीक्षकों की पदस्थापना काउंसिलिंग में गड़बड़ी की पूर्ण संभावनाएं हैं।
हमने पहले ही इनके कार्यशैली पर प्रश्रचिन्ह उठाया था और आप तक ये बताने की कोशिश कि था कि कैसे खुद के ही विभाग के अधीक्षकों का पदस्थापना दूसरे विभाग के शिक्षकों के कारण प्रभावित होने के आसार है जो कही न कही अनुचित है।
आप खुद सोचिए मूल विभाग के कर्मचारियों को छोड़ दूसरे विभाग के कर्मचारियों को प्राथमिकता श्रेणी में रखने की कोशिश करना कहाँ तक उचित है।
और ऐसा क्या कारण है कि शिक्षा विभाग के कर्मचारियों के प्रति इनकी इतनी आत्मीयता है।
माना 2015 के पहले शिक्षा विभाग और ट्राइबल विभाग एक थे।
पर क्या छात्रावास अधीक्षक के पद पर एक अधीक्षक को जितनी तनख्वाह मिलती है उसी तनख्वाह पर सभी
शिक्षक कार्य कर रहे है ये भी एक सवाल है ?
एक ही पद में रहते हुए तनख्वाह में अंतर क्यों?
और शिक्षक अपने मूल विभाग में क्यों नही जाना चाहते या उन्हें नही भेजने का क्या कारण हो सकता है ?

खैर हमने कुछ दिन पूर्व अपने खबर में जो छात्रावास अधीक्षकों की पदस्थापना काउंसिलिंग में गड़बड़ी की पूर्ण संभावनाएं जताया था
ठीक वैसा ही हुआ –
1. विभाग ने आनन फानन में 2 दिवस के अंदर काउंसिलिंग कराने का आदेश जिला स्तर पर दिया जिससे किसी भी अधिकारी को सही प्रक्रिया समझ नही आई।
2. जैसा कि हमने आपको बताया था कि 2022 और 2025 में हुए प्रोमोशन को अलग अलग काउंसिलिंग के माध्यम से करना चाहिए और कोरबा जिले के अधीक्षकों से पता चला है कि जिसे कोरबा कलेक्टर ने इसे भी फॉलो किया है।
3. कोरबा जिले के अधीक्षकों के अनुसार कोरबा जिले में 2015 तथा 2016 बैच की काउंसिलिंग पूर्ण रूप से अलग अलग की गई ।
4. इसी तरह कवर्धा जिले में वरियता संबंधित विवाद होने पर काउंसिलिंग रद्द कर दी गयी तथा उच्चाधिकारियों से मार्गदर्शन मांगा गया।
5. इस प्रक्रिया से लगभग सभी मैदानी जिलों में कुल मिलाकर 500 से 700 अधीक्षकों को अन्य जिले जाना होगा तथा ये सारे छात्रावास, अधीक्षक विहीन हो जाएंगे जिसके बारे में विभाग का कोई निर्देश नहीं है, ऐसे में क्या फिर से शिक्षा विभाग से जो कि स्वयं शिक्षकों की कमी से जूझ रहा है, कर्मचारी आदिवासी विकास विभाग में थोक के भाव में प्रति नियुक्ति पर आएंगे जबकि शासन का स्पष्ट आदेश सभी तरह के संलग्नीकरण को समाप्त करने का है।
6. हमने पहले ही आपको बताया है कि राज्य कैडर का पद होने के कारण किसी भी जिले को कॉउंसलिंग के नियम स्प्ष्ट नही हैं जिससे अव्यवस्था बन रही है।
7. मिले जानकारी के अनुसार अब इस विषय पर छात्रावास अधीक्षक न्यायालय के शरण में जाने की तैयारी में है, उन्हें अब न्यायालय से ही न्याय की उम्मीद है।
अब आगे देखना है कि शासन इस ओर ध्यान दे प्रक्रिया में सुधार करती है या अधीक्षक अपने लिए न्याय की आस में न्यायालय जाते है।
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