रायपुर/छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ में पीएससी परीक्षा की तरह राजस्व निरीक्षक भर्ती परीक्षा में भी गड़बड़ी एवं धांधली के तथ्य सामने आए हैं जिसमें भाई- बहन ,पति- पत्नी ,भाई भाई का चयन किया गया है इतना ही नहीं इन्हें रोल नंबर भी आगे पीछे प्रदान किए गए पीएससी परीक्षा वाले तो घोटालेबाज जेल चले गए हैं जबकि राजस्व निरीक्षक भर्ती परीक्षा विगत 1 वर्ष से जांच प्रक्रिया जारी है, उसके उपरांत भी अभी तक इस पर कोई कार्रवाई न होना समझ से बाहर है।
पीएससी परीक्षा में गड़बड़ी करने वालों को विष्णुदेव की सरकार जेल में डालकर एक सुशासन का उदाहरण प्रस्तुत कर रही है परन्तु राजस्व निरीक्षक भर्ती परीक्षा में कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद भी शासन इस पर ध्यान क्यों नहीं दे रही है अब उम्मीद है की आचार संहिता के बाद उक्त परीक्षा में गड़बड़ी करने वालों को सरकार कार्रवाई करें।
यह कि उक्त विभागीय भर्ती परीक्षा के विज्ञापन में आरक्षण एवं पदों की संख्या के संबंध में कोई प्रावधान नहीं था जबकि विभागीय भर्ती परीक्षा होने के कारण पदों की संख्या निर्धारित करना जरूरी था।
यह की उक्त भर्ती परीक्षा में दो बार पाठ्यक्रम जारी किया गया जिसमें भुइयां सॉफ्टवेयर संबंधित प्रश्नों का कोई उल्लेख नहीं था जबकि परीक्षा में भुइयां सॉफ्टवेयर संबंधित 7 प्रश्न पूछे गए थे।
यह की परीक्षा में भाई बहनों ,भाई- भाई पति- पत्नी आदि पारिवारिक संबंधित व्यक्तियों के 22 लोगों का सिलेक्शन हुआ है जिसमें कइयो को आगे पीछे के रोल नंबर आवंटित किए गए हैं।
यह की राजस्व निरीक्षक भर्ती परीक्षा में प्रवेश पत्र में विशेष निर्देश जारी किए गए थे उनका पालन नहीं किया क्या इसके विपरीत परीक्षा में ओएमआर शीट में परीक्षार्थियों के मोबाइल नंबर संबंधी कॉलम दिया गया था जो कहीं ना कहीं लापरवाही का द्योतक है।
यह की राजस्व निरीक्षक भर्ती परीक्षा में खुलकर धांधली हुई है जिसमें आयुक्त कार्यालय के एक अधिकारी द्वारा सामूहिक प्रश्न पत्र वितरण कर रायपुर के एक होटल में परीक्षा पूर्व प्रश्नों की उत्तर बता दिए गए।
परीक्षा में सेट A में क्रमांक 8 एवं 18 सेट, सेट B क्रमांक 33 ,40 सेट, सी प्रश्न क्रमांक 3 एवं 43 ,सेट D प्रश्न क्रमांक 43 और 48 प्रश्नों के उत्तर में दो ऑप्शंस को सही उत्तर माना गया है जबकि उक्त परिस्थिति में प्रश्न विलोपित किए जाने योग्य थे।
दिनांक 5.9.2024 को जिला कलेक्टर को परीक्षार्थियों दस्तावेज सत्यापन हेतु पत्र व्यवहार किया गया है जबकि उक्त प्रकरण में जांच लंबित होने एवं हाई कोर्ट में प्रकरण लंबित होने के के कारण उक्त कार्रवाई आगे बढ़ाना कहीं ना कहीं संदेहास्पद है।
भर्ती परीक्षा हेतु जनवरी 7 की दिनांक चयनित किया गया जबकि पूरे प्रदेश में नवंबर दिसंबर माह में चुनाव कार्य में पटवारी कार्यरत थे तथा स्वयं राजस्व मंत्री द्वारा 29 दिसंबर को मंत्री पद धारण किया गया मंत्री जी को अंधेरे में रखते हुए उनके पद ग्रहण करने के एक हफ्ते के अंदर उक्त परीक्षा आयोजित कर दी गई।।
परीक्षा में 50 प्रश्न पूछे गए थे जिसके लिए 90 मिनट का समय था लेकिन इन 50 प्रश्नों के अंदर चार प्रश्न थे जो की एबीसीडी क्रमांक के रूप में पूछे गए थे अतः एक ही प्रश्न में 4 प्रश्न पूछे गए थे पता 90 मिनट में 100 प्रश्न हल करना संभव नहीं था अतः उक्त परीक्षा प्रणाली में इतनी कठिन एवं अधिक प्रश्न पूछना कहीं ना कहीं संदेहास्पद है।
उक्त विभागीय परीक्षाएं 2016, 2017 और 2019 में भी आयोजित की गई थी जिसमे अधिकतम अंक 80 एवं न्यूनतम अंक 36 थे परंतु इस पत्र की परीक्षा में तीन प्रश्न विलोपित होने के बावजूद अधिकतम अंक 90 एवं न्यूनतम अंक 64 में सेलेक्शन हुआ है इतने कठिन प्रश्न पत्र होने के बावजूद इतने अधिक अंक प्राप्त करना कहीं ना कहीं संदेह के दायरे में आता है।
परीक्षा पूर्व कुछ विशेष जिलों के पटवारी अधिकारियों की कृपा पात्र हुए हैं खासकर, कोरबा, सरगुजा, बलरामपुर सूरजपुर ,बीजापुर जैसे नक्सली प्रभावित क्षेत्र के पटवारी फार्म में से 90 अंक प्राप्त किए हैं जबकि मैदानी क्षेत्र के पटवारी कई जिलों के कटऑफ से बहुत नीचे हैं।
उक्त विभागीय परीक्षा में कई प्रश्न के उत्तर विभाग द्वारा गलत दिए गए जिसके लिए पटवारीयो से दावा आपत्ति मंगाई गई, पटवारीयो द्वारा उक्त प्रश्न के संबंध में विधिवत दावा आपत्ति प्रस्तुत करने के बावजूद उन प्रश्नों का उत्तर नहीं सुधारा गया और ऐसे ही रिजल्ट जारी कर दिए गए।
विभाग की इन सभी त्रुटियों से क्षुब्ध होकर पटवारी अनिल डोडवानी , चंद्रभान जायसवाल एवं नीलकमल देवांगन द्वारा हाई कोर्ट में पाठ्यक्रम से बाहर प्रश्न पूछने एवं दावा आपत्ति प्रस्तुत करने के बावजूद उत्तर नहीं सुधरने पर याचिका दायर की गई है जो अभी माननीय हाईकोर्ट में लंबित है उसके बाद भी रिजल्ट जारी कर दिया गया। अतः रिजल्ट में इतनी तत्परता दिखाना कहीं ना कहीं इस परीक्षा में बड़े धांधली की ओर इशारा कर रहा है।


