बिलासपुर में मेडिकल बिल घोटाले की गूंज — निजी अस्पताल, SECL और रेलवे डॉक्टरों की सांठगांठ से उड़ाए जा रहे लाखों रुपये!

Gajendra Singh
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WCL में फर्जी मेडिकल बिलों पर हुए एफआईआर से मचा हड़कंप

SECL-रेलवे डॉक्टरों और निजी अस्पतालों की मिलीभगत का पर्दाफाश संभव!

बिलासपुर, छत्तीसगढ़।

केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) ने वेस्टर्न कोल फील्ड लिमिटेड (WCL) डिस्पेंसरी के चिकित्सा अधीक्षक और नागपुर के एक निजी मेडिकल स्टोर के मालिक के खिलाफ धोखाधड़ी वाले मेडिकल बिल बनाने में कथित संलिप्तता के आरोप में भ्रष्टाचार का मामला कुछ दिन पहले दर्ज किया था।

एफआईआर में आरोप लगाया गया था कि आरोपी चिकित्सा अधीक्षक ने झूठे मेडिकल पर्चे तैयार किए, जिनका इस्तेमाल निजी मेडिकल स्टोर के मालिक ने बढ़ा-चढ़ाकर बिल बनाने और डब्ल्यूसीएल से भुगतान प्राप्त करने के लिए किया।

वेस्टर्न कोलफील्ड लिमिटेड (WCL) में उजागर हुए मेडिकल बिल भ्रष्टाचार के बाद अब बिलासपुर के एक निजी अस्पताल, SECL और रेलवे के कुछ डॉक्टरों की मिलीभगत से चल रहे मेडिकल बिल घोटाले ने स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोल दी है।
सूत्रों के अनुसार, यहां वर्षों से फर्जी भर्ती, बढ़े हुए इलाज के बिल और कमीशनखोरी के जरिये सरकारी खजाने को चूना लगाया जा रहा है।

 फर्जी भर्ती और महंगे बिल का खेल

जांच में यह बात सामने आई है कि बिलासपुर के एक नामचीन निजी अस्पताल में मरीजों को भर्ती कर बड़ा बिल बनाया जा रहा है, जबकि वास्तव में उनका इलाज सामान्य स्तर का था।
इसके बाद अस्पताल द्वारा महंगे परीक्षण, सर्जरी और दवाओं के नाम पर बढ़े-चढ़े बिल तैयार कर उन्हें SECL और रेलवे विभाग में मेडिकल क्लेम के रूप में जमा किया जाता है।

 डॉक्टरों को दिया जाता है कमीशन

सूत्र बताते हैं कि इस पूरे खेल में SECL और रेलवे के कुछ चिकित्सा अधिकारी भी शामिल हैं।
अस्पताल प्रशासन हर फर्जी भर्ती या बिल क्लेम के एवज में इन डॉक्टरों को कमीशन देता था, ताकि वे बिना जांचे या कहिए कि उस अस्पताल के बिल के मामले में थोड़ा आँखे मूंद दस्तावेजों पर मंजूरी लगा दिया जाता है।

डॉक्टरों के माध्यम से ही मरीजों को उस निजी अस्पताल में भेज जाता है और उसके एवज में कमीशन लिया जाता है,जिसका साक्ष्य भी मिला है।

茶 फर्जी दावा पर्ची और बिलों की भरमार

जानकारी के मुताबिक अस्पताल और संबंधित मेडिकल स्टोर ने मिलकर फर्जी दवा पर्चियां तैयार की जाती है, जिनमें मरीजों की जानकारी के बिना महंगी दवाएं और जांचें जोड़ी जाती है।
बाद में इन्हीं दस्तावेजों को विभाग के माध्यम से पास कराकर नकद भुगतान या बिल सेटलमेंट कराया जाता था।

️‍♂️ जांच की मांग तेज

एसईसीएल एवं रेल्वे के अधिकारी और कर्मचारियों ने इस पूरे घोटाले की सीबीआई में शिकायत कर जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यह सिर्फ एक अस्पताल या एक-दो डॉक्टरों का मामला नहीं, बल्कि एक संगठित मेडिकल माफिया नेटवर्क बन चुका है, जो सरकारी खजाने को नुकसान पहुँचा रहा है।

“यह घोटाला WCL से भी बड़ा साबित हो सकता है। अगर जांच ईमानदारी से हुई तो कई बड़े नाम सामने आएंगे,”

क्या कार्रवाई होगी?

अब सबकी निगाहें SECL और रेलवे प्रशासन पर हैं कि क्या वे इस मामले में स्वतः संज्ञान लेकर जांच शुरू करेंगे या मामला परंपरा के मुताबिक, फाइलों में दबकर रह जाएगा। हालांकि हमारे पास साक्ष्य है इन सब बातों का और हम इस पर लगातार आपको अपने खबर के माध्यम से बताते रहेंगे की कार्यवाही हो रही है या नही ?

जुड़े रहिए आगे की खबरों के लिए लोकनायक के साथ…

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