
बिलासपुर | 31 जुलाई 2025:
प्रदेश के सरकारी अस्पतालों के डॉक्टरों पर एक बार फिर से गंभीर आरोप लगे हैं। ताजा मामला सामने आया है जिसमें दावा किया जा रहा है कि कुछ डॉक्टर सरकारी सुविधाओं की अनदेखी करते हुए मरीजों को निजी अस्पतालों में रेफर कर रहे हैं और बदले में मोटा कमीशन वसूल रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक, यह ट्रेंड खासकर जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) और जिला अस्पतालों में तेजी से बढ़ रहा है। इसके साथ साथ “एस ई सी एल” के डॉक्टर भी इस रेस में पीछे नही है। उनकी भी शिकायत है कि लम्बे कमीशन के लालच में वो भी किसी से कम नही है और वो भी लगातार बिलासपुर के प्राइवेट हॉस्पिटल में मरीज को भेज कमीशन ले रहे है जबकि उनके अपोलो जैसे बड़े हॉस्पिटल से टाइअप है। शिकायतों के अनुसार, डॉक्टर मरीजों को यह कहकर डराते हैं कि सरकारी अस्पताल में पर्याप्त सुविधा नहीं है या इलाज संभव नहीं है, और फिर उन्हें एक निर्दिष्ट प्राइवेट हॉस्पिटल का नाम देकर रेफर कर देते हैं, और अपनी जेब गरम कर लेते है।
आखिर “एस ई सी एल” के डॉक्टरों को क्या जरूरत पड़ गई कमीशन की उनको तो सरकार वेतन के साथ साथ अन्य बहुत सारी सुविधाएं भी एस ई सी एल देती है।

मरीजों की जेब पर असर, इलाज पर सवाल
ऐसे मामलों में अक्सर मरीजों को बिना ज़रूरत के महंगे टेस्ट, लंबी भर्ती, और ऊंची फीस का सामना करना पड़ता है। कुछ मामलों में तो सरकारी अस्पताल में इलाज संभव होने के बावजूद मरीजों को जबरन बाहर भेजा गया।
एक मरीज के परिजन ने नाम न छापने की शर्त पर बताया:
> “डॉक्टर ने कहा कि सरकारी अस्पताल में मशीन खराब है, जबकि बाद में पता चला कि जांच वहीं हो सकती थी। लेकिन हमें एक खास प्राइवेट क्लिनिक भेजा गया जहाँ बिल ₹50,000 से ऊपर पहुंच गया।”
कमीशन की व्यवस्था कैसे काम करती है?
अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, कई प्राइवेट हॉस्पिटल्स सरकारी डॉक्टरों को 10% से 25% तक कमीशन ऑफर करते हैं, जो मरीज के कुल बिल पर आधारित होता है। यह राशि नगद या किसी अन्य माध्यम से दी जाती है।
प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल
अब सवाल उठ रहे हैं कि अस्पताल प्रशासन इस पूरे सिस्टम से अंजान कैसे बना हुआ है। यदि यह आरोप सही हैं, तो यह न सिर्फ सरकारी चिकित्सा व्यवस्था की साख पर सवाल उठाता है, बल्कि जनता के विश्वास के साथ भी धोखा हो रहा है।


