गोवा “सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव” में बिलासपुर से डॉ. रजनीश हुए शामिल

Gajendra Singh
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गोवा में आयोजित तीन दिवसीय सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव में बिलासपुर से डॉ. रजनीश पाण्डेय को सम्मिलित होने का अवसर प्राप्त हुआ । इस महोत्सव का उद्देश्य सनातन राष्ट्र के संकल्प का शंखनाद करना और उसे गतिमान करना था। इस अवसर पर सनातन संस्था  के संस्थापक सच्चिसदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत बाळाजी आठवलेजी के शुभ हाथों से शंखनाद और वेदमंत्रों के गान के बीच सनातन धर्म के ध्वज का आरोहण किया गया । सनातन संस्था की ओर से आयोजित सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव में हिंदू धर्म जागृति और राष्ट्र रक्षा के लिए कार्य करने वाले व्यक्तियों को सम्मानित किया गया। सनातन संस्था के संस्थापक सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत बालाजी आठवले के 83वें जन्मोत्सव के निमित्त पर उनके शुभ हाथों से 4 लोगों को ‘हिंदू राष्ट्र रत्न’ और 18 लोगों को ‘सनातन धर्मश्री’ पुरस्कार देकर सम्मान किया गया।

इस अवसर पर कार्यक्रम में 23 देशों के 20 हजार से अधिक साधक और हिंदू धर्मप्रेमी उपस्थित थे । व्यासपीठ पर सनातन संस्था के संस्थापक सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवले की आध्यात्मिक उत्तराधिकारी बिंदा सिंगबाळ और अंजली गाडगीळ की वंदनीय उपस्थिति थी । इस अवसर पर सनातन हिन्दू् धर्म का विजय हो और जय श्रीराम के उद़्घोगषों से वातावरण गूंज उठा।
उत्तरप्रदेश के आचार्य गणेश्वर शास्त्री द्रविड, बांग्लादेश मायनॉरिटी वॉच के संस्थापक अधिवक्ता रवींद्र घोष, कर्नाटक के पंचशिल्पकार काशीनाथ कवटेकर, महाराष्ट्र के मुंबई के प्रख्यात प्रवचनकार डॉ. सच्चिदानंद शेवडे को हिंदू राष्ट्र रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया ।
        डॉ. रजनीश ने महोत्सव में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और सनातन राष्ट्र के विषय पर अपने विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि सनातन राष्ट्र की अवधारणा हमें हमारी जड़ों से जोड़ती है और हमें अपने सनातन धर्म एवं देश के प्रति गर्व महसूस कराती है ।

महोत्सव के दौरान विभिन्न सत्रों और चर्चाओं के माध्यम से सनातन राष्ट्र के विषय पर गहराई से विचार-विमर्श किया गया। महोत्सव के अंत में एक सामूहिक संकल्प लिया गया जिसमें सनातन राष्ट्र के निर्माण के लिए सामूहिक प्रयास करने का निर्णय लिया गया।
इसी अवसर पर भाग्यनगर के हिंदुत्वनिष्ठ विधायक टी. राजा सिंह, दिल्ली के काशी-मथुरा के मंदिर मुक्ति के लिए लडने वाले सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन, गोवा के घनपाठी आचार्य योगेश्वर बोरकर, गोवा से पण्डित महामहोपाध्याय डॉ. देवदत्त पाटिल, कर्नाटक के श्रीराम सेना के संस्थापक प्रमोद मुतालिक, कर्नाटक के युवा बिग्रेड के मार्गदर्शक चक्रवर्ती सुलीबेले, दिल्ली से चाणक्य फोरम के संपादक मेजर गौरव आर्य, दिल्ली के सुदर्शन वाहिनी के प्रधान संपादक डॉ. सुरेश चव्हाणके, उत्तर प्रदेश के प्राच्यम के संस्थापक कैप्टन प्रवीण चतुर्वेदी, तमिलनाडु के हिंदू मक्कल कच्ची के संस्थापक अर्जुन संपथ, दिल्ली के सेव कल्चर सेव भारत फाउंडेशन के उदय माहुरकर, कर्नाटक के पूर्व अतिरिक्त महाधिवक्ता अधिवक्ता अरुण श्याम, बेल्जियम के लेखक डॉ. कोएनराड एल्स्ट, ओडिशा के इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज के अनिल कुमार धीर, दिल्ली के अग्नि समाज के संस्थापक संजीव नेवर, दिल्ली के सरयु ट्रस्ट के संस्थापक राहुल दिवान, हरियाणा के विचारक नीरज अत्री, मुंबई के समाजसेवक तथा लेखक डॉ. अमित थडानी, इंडोनेशिया-बाली के धर्मस्थापना फाउंडेशन के रस आचार्य धर्मयश महाराज और छत्तीसगढ के डॉ रजनीश पाण्डेय एवं प्रबल प्रताप सिंह जुदेव मुख्य रूप से सम्मिलित हुए ।

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