
बिलासपुर | 🚑विशेष रिपोर्ट🚑
⛑️स्वास्थ्य पर्दाफाश : सरकारी अस्पतालों में प्राइवेट दखल?
बिलासपुर के एक बड़े सूचीबद्ध प्राइवेट हॉस्पिटल से जुड़े कथित पीआरओ का एसईसीएल और रेलवे हॉस्पिटल में लगातार आना–जाना अब कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। जब वह हॉस्पिटल पहले से ही एसईसीएल और रेलवे की सूचीबद्ध सूची में शामिल है, तो फिर सरकारी डॉक्टरों से बार-बार मुलाकात आखिर किस उद्देश्य से हो रही है?
सूचीबद्ध तो और भी कई हॉस्पिटल हैं, लेकिन केवल कुछ चुनिंदा प्राइवेट हॉस्पिटल के पीआरओ का सक्रिय रहना पूरे सिस्टम पर संशय पैदा करता है।
सूत्रों के अनुसार, एसईसीएल के मनेन्द्रगढ़, कोतमा, दीपका, सुहागपुर तथा रेलवे के बिलासपुर हॉस्पिटल क्षेत्र में “एक हाथ दो – एक हाथ लो” का कथित खेल चल रहा है। आरोप है कि पीआरओ डॉक्टरों से कथित सेटिंग कर मरीजों को निजी हॉस्पिटल रेफर कराते हैं। बदले में भर्ती बिल के प्रतिशत के आधार पर कमीशन तय होता है।
यह रकम कभी नगद तो कभी पत्नी, रिश्तेदार या परिचित के बैंक खातों में ट्रांसफर किए जाने के आरोप भी सामने आ रहे हैं। पूछताछ करने पर कई लोगों द्वारा टालमटोल जवाब दिए गए, जबकि कुछ ने अंदरूनी नेटवर्क की मौजूदगी स्वीकार करने की बात भी कही है।
बिल पास कराने में दूसरा खेल?
मामला केवल मरीज शिफ्ट कराने तक सीमित नहीं है। आरोप है कि बिल पास कराने की प्रक्रिया में भी एसईसीएल और रेलवे के स्वास्थ्य विभाग के कुछ बाबू कथित तौर पर भूमिका निभाते हैं। ऑडिट केवल औपचारिकता बनकर रह जाती है और कमीशन के एवज में बिल पास कर दिए जाते हैं। इससे सरकारी खजाने को सीधा नुकसान पहुंच रहा है।
⚖️ कानूनी एंगल (Legal Angle)
यदि ये आरोप सत्य पाए जाते हैं, तो यह सीधे तौर पर कई गंभीर अपराधों की श्रेणी में आता है:
✅ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988
सरकारी कर्मचारी द्वारा रिश्वत लेना या देना अपराध।
पद का दुरुपयोग कर आर्थिक लाभ पहुंचाना दंडनीय।
✅ भारतीय न्याय संहिता (BNS)
आपराधिक षड्यंत्र
धोखाधड़ी
विश्वासघात
सरकारी धन की हेराफेरी
✅ सरकारी सेवा नियमों का उल्लंघन
कदाचार सिद्ध होने पर निलंबन, बर्खास्तगी और विभागीय कार्रवाई संभव।
✅ रिकवरी और ब्लैकलिस्टिंग का प्रावधान
गलत भुगतान की रिकवरी।
दोषी पाए जाने पर निजी हॉस्पिटल को ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है।
❓ जनहित के सवाल
क्या सरकारी खजाने को लूटने का अधिकार किसी को दिया गया है?
क्या बिना सरकारी कर्मचारियों की मिलीभगत के यह संभव है?
क्या दोषी डॉक्टर और बाबू भी उतने ही जिम्मेदार नहीं हैं जितना निजी हॉस्पिटल?
कब होगी निष्पक्ष जांच और कड़ी कार्रवाई?
👉 कार्रवाई की मांग
उच्च अधिकारियों से मांग की जा रही है कि मामले की विजिलेंस जांच, आवश्यक होने पर सीबीआई जांच, दोषियों पर कठोर कार्रवाई, हॉस्पिटल की ब्लैकलिस्टिंग और सरकारी धन की रिकवरी की जाए, ताकि एक मजबूत संदेश जाए कि भ्रष्टाचार किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
शिकायतें लगातार एसईसीएल और रेलवे प्रशासन को दी जा रही हैं। जल्द ही पूरे साक्ष्यों के साथ विधिवत शिकायत दर्ज कराई जाएगी।
👉आने वाले दिनों में “लोकनायक” इस पूरे मामले से जुड़े दस्तावेज, लेनदेन के प्रमाण और संबंधित किरदारों का खुलासा करेगा।
बने रहिए हमारे साथ — सच सामने लाना हमारा दायित्व है।


