तहसीलदार-नायब तहसीलदारों की हड़ताल दूसरे दिन भी जारी, संघ ने बताया प्रशासन की दोहरी नीति

रायपुर, 1 अगस्त – छत्तीसगढ़ कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ द्वारा बुलाई गई अनिश्चितकालीन हड़ताल आज दूसरे दिन भी पूरे प्रदेश में जोरशोर से जारी रही। प्रदेश के सभी तहसीलदार और नायब तहसीलदार कार्य बहिष्कार पर डटे हुए हैं। अधिकारियों का आरोप है कि सरकार लोक सेवा गारंटी अधिनियम के नाम पर बिना संसाधन दिए अत्यधिक दबाव बना रही है, जिससे न केवल वे काम करने में असमर्थ हैं, बल्कि आम जनता भी परेशान हो रही है।
सेवा देने वालों को नहीं मिल रही सेवा देने की व्यवस्था
संघ का कहना है कि नामांतरण, सीमांकन, बंटवारा, ऋण पुस्तिका, नक़्शा, प्रमाण पत्र जैसी दर्जनों सेवाएँ पूरी तरह तहसील कार्यालय पर निर्भर हैं। लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि:
ऑपरेटरों की भारी कमी है, कई तहसीलों में कोई प्रशिक्षित कर्मचारी ही नहीं
पुराने और बार-बार क्रैश होने वाले कंप्यूटर सिस्टम
धीमी इंटरनेट स्पीड, नेट भत्ता तक नहीं मिलता
प्रिंटर, स्कैनर, स्टेशनरी का खर्च अधिकारी खुद उठा रहे हैं
वाहन, ईंधन, ड्राइवर की कोई सुविधा नहीं, फिर भी रोज सीमांकन की ज़िम्मेदारी
पोर्टल, OTP, अपलोडिंग जैसे कार्यों में सहयोगी स्टाफ नहीं
“हमसे समय-सीमा की उम्मीद, पर साधन नहीं” – संघ का आरोप
संघ ने कहा कि लोक सेवा गारंटी के तहत तय समय में सेवाएं देना अनिवार्य है, नहीं देने पर अधिकारी दंडित होते हैं। लेकिन शासन ने इस सेवा को लागू करने के लिए कोई आधारभूत संरचना नहीं बनाई।

茶 जनता को भी नहीं मिल रही राहत
संघ का मानना है कि ऐसे हालात में अधिकारी केवल काम निपटाने की होड़ में रहते हैं, जिससे निर्णयों में त्रुटियाँ और अन्याय की आशंका बढ़ जाती है। इसका सीधा असर आम नागरिकों, खासकर किसानों और ग्रामीणों पर पड़ता है, जिन्हें अपील और पुनरीक्षण की प्रक्रिया में समय और पैसा गंवाना पड़ता है।
✊ संघ की मुख्य मांगें:
1. प्रत्येक तहसील में 2 कुशल ऑपरेटरों की नियुक्ति
2. कार्यशील डिजिटल उपकरण और इंटरनेट सुविधा
3. वाहन, ईंधन, ड्राइवर की स्थायी व्यवस्था
4. नेट भत्ता और तकनीकी मानदेय
5. कार्यभार के अनुसार स्टाफ का पुनर्वितरण
⚠️ हड़ताल के बीच नई आदेशावली से और बढ़ा आक्रोश
संघ ने शासन द्वारा हाल ही में जारी नए आदेश को भी गैरजरूरी दबाव करार देते हुए कहा कि ऐसे फरमान बिना संसाधनों के लागू नहीं किए जा सकते। इससे विवाद और बिचौलियों की भूमिका फिर से बढ़ेगी। ऐसे में संघ का कहना है कि उनकी हड़ताल न केवल उनके अधिकार बल्कि जनता के हित के लिए भी है।
छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा पारित लोक सेवा गारंटी अधिनियम के अंतर्गत राजस्व विभाग को दर्जनों सेवाओं को निर्धारित समय-सीमा में प्रदान करने की बाध्यता दी गई है। उदाहरण स्वरूप:
नामांतरण – 30 दिवस
सीमांकन – 30 दिवस
बंटवारा – 30/45 दिवस
नक़्शा की नकल – 3/7 दिवस
ऋण पुस्तिका – 7/30 दिवस
*आय/जाति/निवास प्रमाण पत्र – 7 दिवस
*शोध क्षमता प्रमाण पत्र – 7 दिवस
इनमें से अधिकांश कार्य तहसीलदार और नायब तहसीलदार की निगरानी, अनुमोदन और आदेश से ही संपादित होते हैं।
ऐसे में तहसीलदार गुणवत्तापूर्ण और न्याय न देखकर केवल जल्दी-जल्दी प्रकरण निपटने के चक्कर में रहेंगे । आम जनता के साथ अन्याय होगा। और जिस भी जनता के साथ अन्याय होगा वह अपील पुनरीक्षण के चक्कर में पड़कर अपना समय और पैसा दोनों गंवाएगा। यह नया आदेश जनता हित में न होकर तानाशाही की तरह हो गई है । ऐसे में अब प्रकरणों में विवाद बढ़ने की आशंका भी बढ़ गई है। वकील और जमीन दलालों को फिर से किसानों को ठगने का मौका मिल जाएगा। ऐसे हड़ताल के समय में ऐसे आदेश का आना इस बात का की ओर इशारा है तहसीलदारों ने जो हड़ताल किया है वो जनता की हित में है और ऐसे तुगलकी फरमानों को बिना संसाधन के पूरा नहीं किया जा सकता।
“सेवा देने वालों की सेवा सुधारिए, तभी जनता को न्याय मिलेगा”
संघ ने स्पष्ट किया कि जब तक शासन उनके मुद्दों पर गंभीरता से विचार नहीं करता, आंदोलन जारी रहेगा। उनका मानना है कि सेवा सुधार की बात करने से पहले शासन को सेवा देने वालों की दशा सुधारनी होगी।


