20 एकड़ सरकारी जमीन भू-माफिया के नाम दर्ज, पटवारी ने किया खेला, क्या इस बार भी बचेगा दोषी ?

Gajendra Singh
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क्या कहेंगे ऐसे पटवारियों को राजस्व कर्मचारी या भू माफिया ?

फाइल फोटो – कोटा

बिलासपुर राजस्व विभाग पे कुछ कर्मचारियों के कारण पहले ही उंगलियां उठती रही है अब ये सब थोडा हट के कोटा में खेल खलेना शुरू कर दिए है।
बता दूँ की कल ही कोटा एसडीएम ने ग्राम तेन्दुआ प.ह.न 11 तहसील कोटा में बड़े झाड़ का जंगल मद भूमि खसरा न 69/2 के अवैध रूप से बिक्री करने के शिकायत पर पटवारी रेवती रमन सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। चलिए ये तो सराहनीय कदम था।
पर वही कोटा में पूर्व में बिक्री की गई बड़े झाड़ का जंगल वाली भूमि पे आज तक कोई कार्यवाही क्यों नही?

कोटा कार्यालय

आइए आपको विस्तार से बताते है

बिलासपुर | कोटा तहसील के ग्राम मनपहरी में 20 एकड़ की बेशकीमती सरकारी जंगल भूमि को राजस्व रिकॉर्ड में फर्जी तरीके से भू-माफिया के नाम दर्ज किए जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया। पहले से विवादों में घिरे भू-माफिया सतीश सिंह ठाकुर के नाम यह भूमि पटवारियों की मिलीभगत से दर्ज की गई।

वर्ष 2022 में तत्कालीन पटवारी रामफल वस्त्रकार ने इस सरकारी जमीन को खसरा नंबर 55 से विभाजित कर 55/32 से 55/36 तक के हिस्सों में दर्ज कर भू-माफिया सतीश सिंह ठाकुर  को लाभ पहुंचाया था। शिकायत के बाद पटवारी के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई हुई, लेकिन आगे कोई ठोस कानूनी कदम नहीं उठाया गया।

पटवारी रामफल वस्त्रकार से मोबाइल पर बातचीत

2022 के तत्कालीन पटवारी रामफल वस्त्रकार से अभी जब इस विषय पर कॉल लगा कर बात किया गया तो पटवारी साहब बड़े ही मजेदार तरीके से जवाब दिए और उनके जवाब से साफ स्पष्ट हो रहा था कि उन्हें उनकी गलतियों का न तो कोई पश्चतावा है और न ही उच्च अधिकारियों का डर

1) सवाल – पटवारी साहब क्या 2022 में मनपहरी मे आप ही पदस्त थे ?
जवाब – हाँ

2) सवाल – खसरा न 55/32, 55/33, 55/34, 55/35, 55/36 जो कि सरकारी दस्तावेजों में बड़े झाड़ का जंगल दर्ज है वो बिलासपुर के सतीश सिंह (भू माफिया) के नाम आपके कार्यकाल में ही चढ़ा था ?
जवाब – जी हाँ, उसके लिए एफ आई आर भी हुआ था।

3) सवाल – बड़े झाड़ का जंगल सतीश सिंह के नाम कैसे चढ़ा ?
अब इसपे उनका जवाब सुनियेगा बड़ा ही मजेदार है
जवाब – मेरे आई डी से दूसरा व्यक्ति चढ़ा दिया था

4) सवाल – कौन ?
जवाब – मेरा असिस्टेंट

5) सवाल – आपने इस खसरे को दुरुस्त करने के लिए क्या किया ?
जवाब – उसको जीरो करने के लिए तहसील में दे दिया था

6)सवाल –  किनके पास आवेदन दिए थे ?
जवाब – एसडीएम साहब को

7) सवाल – उस समय कौन थे एसडीएम ?
जवाब – थोड़ा भूलने की कोशिश करते हुए फिर बोले सिन्हा साहब थे

8) सवाल – कौन अमित सिन्हा साहब ?
जवाब – हाँ अमित सिन्हा साहब

9) सवाल – वो शून्य हो गया था ?
जवाब – पता नही मैं तो आ गया था

10) सवाल – आपका सतीश सिंह (भू माफिया) से क्या संबंध है सुनने में आया है आप अभी जहाँ बेलतरा में पदस्त है उज़के आपपास के क्षेत्र में भी उसके नाम जमीन चढ़ाये है?
जवाब – घबराते हुए नही नही ऐसा नही है

11) सवाल – अगर इस बात का साक्ष्य दिया तो ?
जवाब – थोड़ा रुक कर फिर मेरे ऊपर कार्यवाही होगा।

नोट – अब आप ऊपर के सवाल न 04 पे गौर करेंगे तो पटवारी खुद स्वीकार कर रहा है कि उसने अस्सिटेंट रखा था और उसने ये गड़बड़ी की है पर क्या आपको लगता है
सर्वप्रथम तो सवाल ये उठता है कि इनको अस्सिटेंट रखे का अधिकार किनके आदेश से होता है।
ज्यादार मामलों में आप देखेंगे कि अस्सिटेंट ये इस लिए नही रखते की इनके ऊपर काम का ज्यादा प्रेसर है बल्कि ये अपने ऊपरी कमाई के रिश्क को कम करने और पकड़े जाने पे सारा दोष उसके ठीकरा फोड़ने के लिए ही अस्सिटेंट को रखा जाता है

अब आप खुद सोचिए ये अस्सिटेंट पटवारी का कर्मचारी होता है या पटवारी और भू माफिया के बीच का पुल होता है।
उच्च अधिकारियों को भी सब पता होता है कि हर पटवारी अपने पास एक या दो अस्सिटेंट रखता है फिर भी उनके ऊपर कोई कार्यवाही नही करते ये अपने आप मे उनके ऊपर एक सवाल खड़ा करता है।

खैर हम अभी के मौजूदा खबर पर बात करते है।

अब हैरानी की बात यह है कि  ग्राम हल्का मनपहरी के मौजूदा पटवारी विनय कुमार बोले ने भी वही भूमि डिजिटल हस्ताक्षर कर दिया उक्त स्थिति यह दर्शाती है कि सरकारी भूमि के दस्तावेजों में हेराफेरी अब गंभीर समस्या बन चुकी है, और कुछ राजस्व कर्मी इसमें सहयोगी की भूमिका निभा रहे हैं।

मिशल

वर्तमान मनपहरी पटवारी विनय बोले से बातचीत

1) सवाल – विनय जी मनपहरी मे खसरा न. 55/32, 55/33, 55/34, 55/35, 55/36 सतीश सिंह (भु माफिया) के नाम से दर्ज है ?
जवाब – हाँ

2) सवाल – सतीश सिंह को भूमि का पट्टा एलॉट हुआ है या क्या है ?
जवाब – भैया वो तो बड़े झाड़ का जंगल है।

3) सवाल – पट्टा तो एलॉट नही हुआ है न ?
जवाब – नही,  आप लेने का सोच रहे है क्या ( पटवारी द्वारा मुझसे पूछा गया)
मेरे द्वारा जवाब – नही नही मुझे खबर लगाने के लिए जानकारी चाहिए
पटवारी – भैया शाम में मिल के बात करे क्या मैं बिलासपुर मन्नू चौक में ही रहता हूँ।

बाद में दो बार पटवारी विनय बोले को कॉल किया गया तो वो मिलने के लिए मन्नू चौक पे ही हमे बुला रहे थे।ये भी अपने आप मे एक सवाल है।
अब सवाल ये उठता है कि जब वर्तमान मनपहरी पटवारी विनय बोले को भी ये पता है कि वो बड़े झाड़ का जंगल है तो वो इसकी उच्च अधिकारियों से शिकायत करने के बजाए उसका डीएससी क्यों किये ये कही न कही इनके कार्याश्रेणी पर भी थोड़ा संका करने पे मजबूर करता है।

क्या इस बार भी सिर्फ निलंबन की कार्रवाई कर पटवारी को बचा लिया जाएगा? या फिर भू-माफिया और जिम्मेदार राजस्व कर्मचारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करते हुए एफआईआर दर्ज की जाएगी?

मामला केवल एक गांव या एक पटवारी तक सीमित नहीं है…

यह उस गहरी व्यवस्था की ओर इशारा करता है जिसमें सरकारी संपत्तियों की बंदरबांट, कानूनी प्रक्रिया को दरकिनार कर, कागज़ों में वैधता दिलाने का सुनियोजित तरीका बनता जा रहा है। अब देखना है कि शासन इस प्रकरण को एक और “निलंबन फाइल” बनाकर बंद करता है, या फिर नियमानुसार सख्त कदम उठाकर एक उदाहरण पेश करता है क्योंकि प्रशासन की चुप्पी और धीमी प्रक्रिया से जनता का भरोसा डगमगाना स्वाभाविक है।
           सूत्रों की माने तो भु माफिया सतीश सिंह ठाकुर निवासी बहतराई के नाम उक्त रामफल वस्त्रकार ने सिर्फ कोटा में ही नही वर्तमान पदस्थापना की तहसील बेलतरा के भी अन्य ग्रामो में भी सरकारी भूमि उसके नाम चढ़ाई गई है और कुछ का रकबा भी बढ़ाया गया है।

आगे की खबर में बेलतरा तहसील के राजस्व भूमियो में छेड़छाड़ का अलग से प्रकाशित कर इसकी पूर्ण जानकारी दी जाएगी।

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