“SDM की सील पर प्राइवेट कर्मचारी के हस्ताक्षर! बिलासपुर तहसील में चल रहा समानांतर शासन? टेलीफोनिक बातचीत में खुद कबूला—‘हाँ, मैं साइन करता हूँ’”

Gajendra Singh
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उप-हेडिंग: राजस्व विभाग में बड़ा सवाल—क्या वर्षों से सरकारी दस्तावेजों में हो रहा है हस्ताक्षर का खेल? उच्च अधिकारियों की जानकारी में था या फिर लापरवाही की पराकाष्ठा?

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ राजस्व विभाग और बिलासपुर तहसील का नाम विवादों में आना अब कोई नई बात नहीं रह गई है। आए दिन किसी न किसी मामले को लेकर सुर्खियों में रहने वाली बिलासपुर तहसील एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में है।

इस बार मामला सीधे अनुविभागीय अधिकारी (SDM) कार्यालय की कार्यप्रणाली और सरकारी दस्तावेजों की वैधता से जुड़ा हुआ दिखाई दे रहा है।

जानकारी के अनुसार बिलासपुर एसडीएम कार्यालय में एसडीएम कोर्ट के बाजू में बैठने वाले राकेश साहू नामक व्यक्ति को लोकसेवा केंद्र से संबंधित कर्मचारी बताया जाता है। उसका कार्य आधार कार्ड में नाम सुधार, जाति प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र सहित अन्य लोकसेवा संबंधी प्रक्रियाओं का संचालन करना बताया जा रहा है।

मामला तब गंभीर हो गया जब कुछ दस्तावेज ऐसे सामने आए जिनमें एसडीएम कार्यालय की सील के ऊपर हस्ताक्षर वर्तमान एसडीएम के हस्ताक्षरों से अलग पाए गए। इस संबंध में जब राकेश साहू से टेलीफोन पर चर्चा की गई तो बातचीत के दौरान कई चौंकाने वाले जवाब सामने आए।

सवाल: हमारे पास कुछ दस्तावेज हैं जिनमें आधार में नाम सुधार के लिए आवेदन डला है, जिसमें एसडीएम की सील के ऊपर किसी दूसरे व्यक्ति के हस्ताक्षर हैं?

राकेश साहू: नहीं रहता है।

सवाल: मेरे पास जो दस्तावेज है उसमें वर्तमान एसडीएम मनीष साहू जी के हस्ताक्षर नहीं हैं, किसी और के हैं और वह दस्तावेज आपके द्वारा जारी हुआ है?

राकेश साहू: मेरे द्वारा नहीं दिया गया होगा, या तो एंट्री नहीं हुआ होगा।

सवाल: बात एंट्री होने या नहीं होने की नहीं है, बात यह है कि अनुविभागीय अधिकारी की सील के ऊपर किसका हस्ताक्षर होना चाहिए?

राकेश साहू: अनुविभागीय अधिकारी का।
(सवालों से घिरने पर राकेश साहू बार-बार एंट्री की बात दोहराते रहे।)

सवाल: मैंने अन्य दस्तावेजों में वर्तमान एसडीएम के हस्ताक्षर देखे हैं, उनमें और मेरे पास के दस्तावेज में हस्ताक्षर बिल्कुल अलग हैं?

राकेश साहू: पटवारी लोगों को कभी भेजना होता है तो जाता है।

सवाल: ‘हल्का पटवारी जांच कर प्रतिवेदन देवे’ लिखकर जो सील लगी है उसके ऊपर हस्ताक्षर हैं?

राकेश साहू: वो “एस” वाला सिग्नेचर है, अरे वो तो हम लोग पटवारी को भेजते हैं, वो है।

एसडीएम का शील और कर्मचारी द्वारा किया गया सिग्नेचर

सवाल: यानी एसडीएम की सील के ऊपर अपना हस्ताक्षर कर देते हैं आप?

राकेश साहू: हाँ, पटवारी वाले में मैं छोटा सा सिग्नेचर करता हूँ कि यहाँ से भेजा गया है करके। एसडीएम का सिग्नेचर नहीं करता, वो तो पटवारी के लिए है।

सवाल: पटवारी के लिए हो या तहसीलदार के लिए, हमारा सवाल सिर्फ इतना है कि एसडीएम की सील के ऊपर आप हस्ताक्षर कर सकते हैं क्या?

राकेश साहू: नहीं, वो नहीं कर सकता, पर पूर्व एसडीएम वैभव क्षेत्रज्ञ साहब ने कहा था कि कर दिया करो।

सवाल: पूर्व एसडीएम ने ऐसा कहा था?

राकेश साहू: नहीं… मतलब वो बोलते थे कि पटवारी को भेजते हो ना, तो लिखा करो।

बातचीत के दौरान यह स्पष्ट दिखाई दिया कि पहले हस्ताक्षर करने की बात स्वीकार की गई और बाद में उसे अलग-अलग तरीके से समझाने का प्रयास किया गया।

इसके बाद जब एसडीएम कार्यालय पहुंचकर राकेश साहू से आमने-सामने इस विषय पर पूछा गया तो उनका जवाब और भी हैरान करने वाला था। उन्होंने कहा कि यदि यह आपत्ति का विषय है तो वे वर्तमान एसडीएम साहब को बता देंगे कि आगे से ऐसे हस्ताक्षर नहीं करूंगा।
और आप आये थे और इस विषय पर पूछ रहे थे।
(उसके बताए अनुसार तो वर्तमान एसडीएम को भी इस विषय के बारे में सब पता है) पर हम ये आरोप नही लगा रहे है कि वर्तमान एसडीएम को जानकारी थी या नही।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि कोई व्यक्ति स्वयं स्वीकार कर रहा है कि वह एसडीएम कार्यालय से पटवारी को भेजे जाने वाले दस्तावेजों में एसडीएम की सील के ऊपर हस्ताक्षर करता रहा है, तो क्या यह सरकारी प्रक्रिया का उल्लंघन नहीं है?

कानूनी दृष्टि से मामला कितना गंभीर?

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी सक्षम प्राधिकारी की अधिकृत सील के ऊपर बिना वैधानिक अधिकार हस्ताक्षर करना गंभीर प्रशासनिक अनियमितता की श्रेणी में आ सकता है। यदि ऐसे हस्ताक्षरों का उपयोग किसी सरकारी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने, दस्तावेज की वैधता प्रदर्शित करने या शासकीय कार्रवाई के लिए किया गया हो तो इसकी विस्तृत जांच आवश्यक हो जाती है।

ऐसी स्थिति में यह भी जांच का विषय बनता है कि—

क्या यह कार्य केवल कुछ दस्तावेजों तक सीमित था या वर्षों से चल रहा था?

क्या वरिष्ठ अधिकारियों को इसकी जानकारी थी?

यदि जानकारी थी तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

यदि जानकारी नहीं थी तो एसडीएम कार्यालय के भीतर चल रही ऐसी प्रक्रिया से अधिकारी अनभिज्ञ कैसे रहे?

क्या अन्य दस्तावेजों में भी इसी प्रकार के हस्ताक्षरों का उपयोग हुआ है?

क्या सरकारी अभिलेखों के साथ किसी प्रकार की छेड़छाड़ या प्रक्रिया का उल्लंघन हुआ है?

राजस्व विभाग की साख से जुड़े इस मामले में अब आवश्यकता है कि जिला प्रशासन, संभागीय आयुक्त एवं राजस्व विभाग के वरिष्ठ अधिकारी पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराएं तथा यह स्पष्ट करें कि आखिर एक गैर-अधिकृत कर्मचारी को एसडीएम कार्यालय की सील के ऊपर हस्ताक्षर करने का साहस कहां से मिला।

क्योंकि सवाल केवल एक हस्ताक्षर का नहीं, बल्कि सरकारी दस्तावेजों की विश्वसनीयता, प्रशासनिक जवाबदेही और आम जनता के भरोसे का है।

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“जनता पूछ रही है—SDM की सील पर आखिर किसके अधिकार से चल रही थी कलम?”
“अगर यह सामान्य प्रक्रिया थी तो नियम कहाँ हैं, और यदि नियम विरुद्ध थी तो जिम्मेदार कौन?”

इसी कर्मचारी राकेश साहू के और भी कारनामो का जल्द करेंगे खुलासा बने रहिए “लोकनायक” के साथ…

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