मरीजों की आड़ में करोड़ों की बंदरबांट!

Gajendra Singh
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एसईसीएल-रेलवे स्वास्थ्य विभाग और निजी अस्पताल की कथित साँठगाँठ पर जल्द गिर सकती है केंद्रीय जाँच की गाज

बिलासपुर में एक बड़े निजी अस्पताल, एसईसीएल मुख्यालय स्वास्थ्य विभाग तथा रेलवे स्वास्थ्य विभाग के बीच कथित साँठगाँठ का मामला अब बेहद गंभीर होता जा रहा है। आरोप है कि एसईसीएल और रेलवे कर्मचारियों के इलाज के नाम पर वर्षों से करोड़ों रुपये का झोलमाल किया जा रहा है, जिसमें मरीजों को निजी अस्पताल भेजने से लेकर बढ़े हुए बिल पास कराने और दवाइयों के नाम पर सरकारी धन के दुरुपयोग तक का पूरा नेटवर्क सक्रिय है।

हमारे द्वारा लगातार इस पूरे मामले की जानकारी और दस्तावेज एकत्रित किए जा रहे हैं। जांच के दौरान यह बात सामने आई है कि एसईसीएल के विभिन्न क्षेत्रों में पदस्थ कुछ डॉक्टरों पर मरीजों को विशेष निजी अस्पताल भेजने के एवज में कमीशन लेने के आरोप हैं। वहीं मुख्यालय स्तर पर कुछ अंदरूनी कर्मचारियों और अधिकारियों की मिलीभगत से कथित रूप से बढ़ी हुई राशि वाले बिलों को आसानी से पास कराया जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार इलाज और दवाइयों के नाम पर सरकारी राशि का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया गया है। कई मामलों में जरूरत से ज्यादा दवाइयां, महंगे उपचार और बढ़े हुए मेडिकल बिल दिखाकर विभाग से भुगतान लेने की बात सामने आ रही है। आरोप यह भी है कि लंबे समय से यह पूरा खेल सुनियोजित तरीके से चल रहा है और संबंधित विभागों के कुछ कर्मचारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है।

हमारे द्वारा एसईसीएल के उच्च अधिकारियों से मुलाकात कर उन्हें पूरे मामले से अवगत कराया गया। साथ ही यह भी बताया गया कि हमारे पास इस कथित खेल से जुड़े कई महत्वपूर्ण साक्ष्य और दस्तावेज मौजूद हैं। इसके बावजूद पिछले 4 से 5 महीनों में कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति किए जाने का आरोप लग रहा है।

👉सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि आखिर जांच के नाम पर इतनी ढिलाई क्यों बरती जा रही है?

सूत्रों के अनुसार जिस निजी अस्पताल पर गंभीर आरोप लग रहे हैं, उसी अस्पताल में एसईसीएल के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। यह स्थिति सीधे तौर पर एसईसीएल स्वास्थ्य विभाग और संबंधित अधिकारियों के रवैये पर सवाल खड़े कर रही है। हमारे द्वारा उच्च अधिकारियों को कई महत्वपूर्ण जानकारियां और कथित साक्ष्य उपलब्ध कराने के बावजूद यदि उसी अस्पताल में लगातार मरीज भेजे जा रहे हैं, तो इससे पूरे मामले में अंदरूनी मिलीभगत और सेटिंग की आशंका और गहरी होती जा रही है। अधिकारियों का यह लापरवाहीपूर्ण रवैया अब शक की सुई को और भी गहराता हुआ दिखाई दे रहा है।

बताया जा रहा है कि विभाग के कुछ कर्मचारी और डॉक्टर इस पूरे मामले में कथित रूप से महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। यही कारण है कि कार्रवाई में हो रही देरी अब केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि सुनियोजित संरक्षण के रूप में भी देखी जाने लगी है। जानकारों का कहना है कि यदि समय रहते निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो भविष्य में कई बड़े नाम और अंदरूनी चेहरे भी सामने आ सकते हैं।

विशेष रूप से इस पूरे मामले को सुलझाने और दबाने में उस निजी अस्पताल के दो प्रमुख पीआरओ, कुछ डॉक्टर और अन्य कर्मचारी सक्रिय रूप से लगे हुए बताए जा रहे हैं। अंदरखाने लगातार बैठकों और समन्वय की चर्चाएं भी सामने आ रही हैं

वहीं अब इस पूरे मामले को लेकर Central Vigilance Commission (CVC) में शिकायत करने की तैयारी चल रही है। हालांकि शिकायत की प्रक्रिया में कुछ तकनीकी और दस्तावेजी कारणों से थोड़ी देरी हुई है, लेकिन बहुत जल्द सभी साक्ष्यों के साथ औपचारिक शिकायत दर्ज कराए जाने की बात कही जा रही है।

यदि यह मामला केंद्रीय स्तर की जांच एजेंसियों तक पहुंचता है तो बिलासपुर में स्वास्थ्य विभाग, मेडिकल भुगतान प्रणाली और निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली से जुड़े कई बड़े खुलासे सामने आ सकते हैं। फिलहाल इस पूरे मामले ने एसईसीएल और रेलवे स्वास्थ्य विभाग में हलचल बढ़ा दी है।

👉बहुत जल्द आगे और भी खुलासे होंगे जुड़े रहिए “लोकनायक प्रेस” के साथ…

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