
बिलासपुर/पचपेड़ी। लोहर्सी ग्राम पंचायत के सरपंच अनिल साहू एक बार फिर विवादों के केंद्र में हैं। पचपेड़ी तहसीलदार नीलम पिस्दा से कथित दुर्व्यवहार और प्रशासनिक कार्य में दबाव बनाने के आरोपों के बीच उनके पुराने आपराधिक रिकॉर्ड और गांव में उनके व्यवहार को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
क्या है पूरा मामला?
तहसीलदार को फोन कर दिया सीधा आदेश सूत्रों के अनुसार सरपंच अनिल साहू ने तहसीलदार नीलम पिस्दा को फोन कर कहा कि लोहर्सी के पटवारी की ड्यूटी किसी अन्य स्थान पर नहीं लगाई जाए और वह केवल उनके गांव का ही काम करे।
प्रशासनिक आवश्यकता बताने पर भड़के जब तहसीलदार ने सीमांकन और अन्य राजस्व कार्यों के लिए आवश्यकता पड़ने पर पटवारी की ड्यूटी अन्यत्र लगाने की बात कही तो सरपंच कथित रूप से नाराज हो गए और इसका विरोध करने लगे।
पटवारी पर लगाए झूठे अनुपस्थिति के आरोप? जानकारी के अनुसार सरपंच द्वारा पटवारी के नियमित रूप से नहीं आने की बात कही गई, जबकि सवाल यह उठ रहा है कि यदि कोई पटवारी लगातार अनुपस्थित रहता तो गांव के राजस्व और शासकीय कार्य सुचारू रूप से कैसे संचालित होते? प्रशासनिक सूत्रों का मानना है कि अतिरिक्त ड्यूटी या सीमांकन कार्यों के कारण किसी दिन देरी होना और लगातार अनुपस्थित रहना दो अलग-अलग बातें हैं।
गांव में भी चर्चा का विषय बना व्यवहार ग्रामीणों के बीच लंबे समय से सरपंच के अभद्र व्यवहार, गाली-गलौज और लोगों से विवादित तरीके से बात करने की चर्चा होती रही है। कई ग्रामीणों का कहना है कि छोटी-छोटी बातों पर भी वह आक्रामक भाषा का प्रयोग करते हैं।
पंचों में भी नाराजगी की चर्चा स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि पंचायत के कई पंच और ग्रामीण उनके कार्यशैली से संतुष्ट नहीं हैं तथा उनके व्यवहार को लेकर समय-समय पर असहमति जताते रहे हैं।
दो मामलों में चार्जशीटेड सरपंच
⚫ 2025 में अभद्र भाषा और आपराधिक धमकी का मामला उपलब्ध आईसीजेएस रिकॉर्ड के अनुसार वर्ष 2025 में अनिल साहू के खिलाफ अभद्र भाषा, आपराधिक धमकी सहित अन्य धाराओं में मामला दर्ज हुआ था, जिसमें पुलिस द्वारा चार्जशीट प्रस्तुत की जा चुकी है।
⚫ 2024 में भी दर्ज हुआ था आपराधिक प्रकरण वर्ष 2024 में भी उनके खिलाफ एक अन्य प्रकरण दर्ज हुआ था, जिसमें बाद में चार्जशीट दाखिल की गई।
⚫ पत्रकार से विवाद भी आया था सामने जानकारी के अनुसार पूर्व में एक पत्रकार के साथ भी अभद्र भाषा के उपयोग को लेकर विवाद हुआ था और इसकी शिकायत थाने तक पहुंची थी।
बड़ा सवाल
एक ओर प्रशासनिक अधिकारी से कथित दुर्व्यवहार, दूसरी ओर दो अलग-अलग मामलों में चार्जशीट और गांव में लगातार विवादित व्यवहार की चर्चाएं—ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या जनप्रतिनिधि होने का अर्थ प्रशासनिक व्यवस्था पर दबाव बनाना है? अब देखना होगा कि तहसीलदार से कथित दुर्व्यवहार के इस मामले में प्रशासन क्या कदम उठाता है।

