“पत्रकारों की एकजुटता से ही मजबूत होगा लोकतंत्र का चौथा स्तंभ”

✍️ गजेन्द्र सिंह की कलम से…
“पत्रकारिता की ताकत खबरों में नहीं, जनता के विश्वास में होती है।”
बिलासपुर। लोकतंत्र में पत्रकारिता को चौथा स्तंभ कहा जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य जनता तक निष्पक्ष, तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी जानकारी पहुंचाना है। लेकिन हाल के वर्षों में बिलासपुर जिले सहित प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में पत्रकारों पर हमले, उन्हें विवादित मामलों में फंसाने के आरोप, तथा पत्रकारों के बीच आपसी मतभेदों और एक-दूसरे के खिलाफ खबरें प्रकाशित करने जैसी घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। ऐसे घटनाक्रम पत्रकारिता की गरिमा और विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर रहे हैं।
पत्रकार समाज और प्रशासन के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी होता है। जब पत्रकार स्वयं विवादों, गुटबाजी और व्यक्तिगत द्वेष का हिस्सा बनते दिखाई देते हैं, तो इसका सीधा असर आम जनता के विश्वास पर पड़ता है। आम नागरिक यह अपेक्षा करता है कि पत्रकार निष्पक्ष रहकर जनहित के मुद्दों को उठाएं, न कि व्यक्तिगत मतभेदों को खबरों का माध्यम बनाएं।
विशेषज्ञों का मानना है कि पत्रकारों पर होने वाले हमले लोकतंत्र के लिए चिंताजनक हैं और ऐसे मामलों में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं दूसरी ओर, यदि कोई व्यक्ति पत्रकारिता की आड़ में अपने पद या पहचान का दुरुपयोग करता है, तो उसके खिलाफ भी कानून के तहत उचित कार्रवाई की व्यवस्था पहले से मौजूद है। इसलिए किसी भी विवाद का समाधान कानूनी और संस्थागत तरीके से होना चाहिए, न कि व्यक्तिगत प्रतिशोध या सार्वजनिक आरोप-प्रत्यारोप के माध्यम से।
पत्रकारिता की साख बनाए रखने के लिए आवश्यक है कि जिले के सभी पत्रकार व्यक्तिगत मतभेदों से ऊपर उठकर पत्रकारिता के मूल सिद्धांतों—सत्य, निष्पक्षता और जनहित—को प्राथमिकता दें। विभिन्न पत्रकार संगठनों और वरिष्ठ पत्रकारों को भी इस दिशा में पहल करते हुए संवाद, समन्वय और आचार संहिता के पालन को बढ़ावा देना चाहिए।
आज आवश्यकता इस बात की है कि पत्रकार एकजुट होकर न केवल अपने अधिकारों की रक्षा करें, बल्कि समाज में पत्रकारिता की सकारात्मक और विश्वसनीय छवि को भी मजबूत करें। क्योंकि यदि चौथे स्तंभ पर जनता का विश्वास कमजोर होता है, तो इसका असर केवल पत्रकारिता पर ही नहीं बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती पर भी पड़ता है।
जनता का विश्वास पत्रकारिता की सबसे बड़ी पूंजी है। इसे बचाए रखना हर पत्रकार, मीडिया संस्थान और पत्रकार संगठन की सामूहिक जिम्मेदारी है। समय रहते आत्ममंथन और सुधार की दिशा में ठोस कदम उठाना ही पत्रकारिता की गरिमा और सम्मान को बनाए रखने का सबसे प्रभावी मार्ग होगा।
“यह लेख पत्रकारिता के वर्तमान परिदृश्य पर लेखक का व्यक्तिगत चिंतन है। इसका उद्देश्य किसी व्यक्ति, संस्था अथवा संगठन विशेष को लक्ष्य करना नहीं, बल्कि पत्रकारिता की गरिमा, एकता और जनविश्वास को लेकर सकारात्मक संवाद स्थापित करना है।”

