एसडीएम कार्यालय के दो रीडर सहित सिरगिट्टी पटवारी निलंबित, डायवर्सन शिकायत के बाद हाइकोर्ट ने लिया था संज्ञान, कलेक्टर की बड़ी कार्रवाई… पर क्या ये कार्यवाही सही?

Gajendra Singh
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बिलासपुर। कलेक्टर ने राजस्व प्रकरणों में लापरवाही बरतने पर राजस्व विभाग के सहायक ग्रेड 3 समीर कुमार तिवारी, निर्मल शुक्ला सहायक ग्रेड 2 राजस्व कार्यालय तखतपुर(वाचक अनुभागीय अधिकारी राजस्व,बिलासपुर) एवं पटवारी हल्का न. 41 मौजा सिरगिट्टी के पटवारी विजय भारत साहू को निलंबित कर दिया है।
पर क्या ये कार्यवाही सही हुआ है क्या ये बाबू और पटवारी सिर्फ अपने लिए पैसे की मांग करते थे या इनको ऊपर भी चढ़ावा चढ़ाना होता था। देखा जाए तो ये हाईकोर्ट के फटकार से बचने के लिए खानापूर्ति किया गया है,क्या कोई बाबू बिना संरक्षण के पैसे की मांग कर सकता है। क्योंकि बिलासपुर राजस्व विभाग के तहसील कार्यालय में प्रचलन तो लम्बे समय से चलता आ रहा है। राजस्व के नए नए कारनामो के लिए तो बिलासपुर तहसील पूरे प्रदेश में फेमस है। क्या ऐसा नही लगता कि इन दो रीडरों और पटवारी पर कार्यवाही कर बड़े पदों को बचाने का एक प्रयास किया गया है।

वैसे बिना अवैध वसूली के बिलासपुर एसडीएम और तहसील कार्यालय में डायवर्सन नही किया जाता है, और इसी मामले को लेकर हाईकोर्ट ने शपथ पत्र के साथ कलेक्टर, एसडीएम को तलब किया है, इसीलिए यह कार्यवाही को उसी मामले से जोड़ कर देखा जा रहा है।
वैसे कल के हमारे लोकनायक न्यूज़ पोर्टल में डायवर्सन का रेट लिस्ट की खबर लगाया गया था जो लम्बे समय से चलता आ रहा था,फिर हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद ही ये कार्यवाही क्यों कि गई।
कल के प्रकाशन में बताया गया था कि बिलासपुर तहसील में डायवर्सन का किस विभाग में कितना रेट फिक्स है आज उस रेट लिस्ट को पुनः प्रकाशित कर रहा हूँ।

अधिकार अभिलेख का 300/- से 400/-,
मिशल 200/-, पटवारी प्रतिवेदन निकालने का कर्मचारी का 200/- उसके बाद पटवारी का 1500/- से 2000/-, तहसील में बैठे आर.आई का 1500/- से 2000/– (जैसा जमीन का साइज अगर जमीन बड़ी है तो पैसा बढ़ जाता है), फिर एसडीएम के नीचे बैठे कर्मचारी एसडीएम से आदेश में साइन कराने में नाम पर प्लाट साइज के हिसाब से 5000/- से 10000/- तक, फिर अन्त में कलेक्ट्रेट शाखा में ऊपर बैठे आर.आई साहब लोगो का भी तो हक बनता है फिर वहाँ का चढ़ावा है 1500/- से 2000/- तब जा कर आपका डायवर्सन का कार्य हो पायेगा। वैसे ही हर कार्य जैसे नामांतरण, सीमांकन, फावती का यहाँ रेट फिक्स है।
वैसे अधिकांश देखा जाता है अधिकारी राजस्व विभाग में खुद को बचाने और शरीफ बताने छोटे कर्मचारियो को बलि का बकरा बनाते हैं लेकिन खुद दूध के कितने धुले है ये हर कोई जानता है

खैर अभी तो इतनी कार्यवाही कर हाईकोर्ट में जवाब देना तो बनता है।

देखिए आदेश…

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