बिलासपुर राजस्व तंत्र में घुस चुका है रिश्वत का ज़हर

Gajendra Singh
Read Time:3 Minute, 18 Second

किसान ने सिस्टम को आईना दिखाया

भ्रष्ट अधिकारी देशकुमार कुर्रे

बिलासपुर का राजस्व तंत्र अब सेवा का नहीं, सौदेबाज़ी का अड्डा बनता जा रहा है। आम किसान, जो अपनी ही पैतृक ज़मीन के नामांतरण के लिए तहसील दफ्तरों के चक्कर लगाते हैं, उन्हें काम के बदले रिश्वत देना अब मजबूरी बना दिया गया है।

कॉफी हाउस में 50 हजार की रिश्वत लेते नायब तहसीलदार की गिरफ्तारी ने इस सड़े हुए सिस्टम की पोल खोल दी है। अब वक्त है कि सरकार ऐसे भ्रष्ट अफसरों पर कड़ी कार्रवाई कर उदाहरण पेश करे, ताकि किसान फिर से शासन को “अपना” मान सके।

किसान ने सिस्टम को आईना दिखाया

बिलासपुर का हालिया मामला एक बार फिर दिखाता है कि राजस्व तंत्र में रिश्वतखोरी कितनी गहराई तक जड़ें जमा चुकी है। सीपत के नायब तहसीलदार देश कुमार कुर्रे को एसीबी ने 50 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा। उसने ग्राम बिटकुला के किसान से 21 एकड़ पैतृक जमीन के नामांतरण के बदले डेढ़ लाख रुपए की मांग की थी।

लेकिन इस बार कहानी अलग थी। किसान प्रवीण पाटनवार ने झुकने के बजाय लड़ने का रास्ता चुना। उसने एसीबी में शिकायत कर ट्रैप प्लान बनवाया और आरोपी तहसीलदार को रंगे हाथ पकड़वाया। एक साधारण किसान ने उस व्यवस्था को आईना दिखाया, जो जनता की सेवा के लिए है लेकिन सेवा के नाम पर सौदेबाज़ी में लिप्त हो चुकी है।

आज नामांतरण, फौती और वारिसान जैसे सामान्य कार्यों के लिए भी दफ्तरों में बिना “कमीशन” के काम होना मुश्किल है। किसान, मज़दूर और आम नागरिक अपने ही अधिकारों के लिए घूस देने को मजबूर हैं। यह केवल एक अधिकारी की गलती नहीं, बल्कि उस मानसिकता की उपज है जहां “काम नहीं, कमीशन बोलता है।”
ऐसे में भला न्याय और प्रशासन पर जनता का भरोसा कैसे कायम रहेगा?

एसीबी की इस कार्रवाई ने एक सच्चाई उजागर की है—भ्रष्टाचार के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार कानून नहीं, जनता की हिम्मत है। जब तक आम नागरिक डरना छोड़कर आवाज़ नहीं उठाएंगे, तब तक ये तंत्र साफ़ नहीं होगा।

अब ज़रूरत है कि सरकार ऐसे मामलों में केवल गिरफ्तारी तक सीमित न रहे, बल्कि सख्त दंड और त्वरित निलंबन की नीति अपनाए। ताकि हर अफसर को याद रहे।
“किसान की खामोशी खरीदना आसान नहीं।”

Leave a Reply

Next Post

"चुनावी ड्यूटी ऑन: अब छुट्टी नहीं, सिर्फ़ जिम्मेदारी!”

विशेष गहन पुनरीक्षण कार्य में लगे कर्मचारियों के अवकाश पर रोक बिलासपुर, 17 नवम्बर 2025।भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार जिले में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण का काम तेज़ी से चल रहा है। 28 अक्टूबर से शुरू हुए इस महत्त्वपूर्ण अभियान में 7 फरवरी 2026 को अंतिम मतदाता सूची […]

You May Like